MyMandirInstall

6.3.2026 संसार में हार जीत तो सबके साथ लगी ही रहती है। प्रतिदिन कोई न कोई व्यक्ति हारता है, और कोई न कोई जीतता है। *"चाहे स्कूल कॉलेज की परीक्षा हो, चाहे कोई खेलकूद प्रतियोगिता हो, चाहे कोई शैक्षणिक प्रतियोगिता हो, कोई भी क्षेत्र हो, सभी में हार जीत तो होती ही रहती है।"* सभी लोग तो प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर नहीं आ सकते। इसलिए यदि आप यह सोचें कि *"आप प्रतियोगिता में सदा प्रथम द्वितीय स्थान प्राप्त करेंगे अथवा आपके बच्चे सदा प्रथम द्वितीय स्थान प्राप्त करेंगे, तो यह सोचना ठीक नहीं है।"* जैसी जिसकी तैयारी होती है, जितना वह पुरुषार्थ करता है, उसी हिसाब से उसको हार या जीत प्राप्त होती है। यदि आप या आपके बच्चे कहीं किसी प्रतियोगिता में जीत जाएं, तो अच्छी बात है। परंतु जैसा कि संसार का नियम है, कि *"सदा सबको सब क्षेत्रों में जीत प्राप्त नहीं होती। कभी-कभी हार भी होती है।" "तो जब हार हो जाए, तब निराश नहीं होना चाहिए। न तो आप निराश हों, और न ही आपके बच्चे। आप स्वयं भी उस हार को सहन करना सीखें, और अपने बच्चों को भी सिखाएं।"* *"यदि आप ऐसा अभ्यास नहीं करेंगे, तो भविष्य में जब आप या आपके बच्चे किसी क्षेत्र में हार जाएंगे, तब आप या आपके बच्चे उदास हो जाएंगे, और हो सकता है धीरे-धीरे आप या आपके बच्चे डिप्रेशन में चले जाएं।"* *"जब व्यक्ति डिप्रेशन में चला जाता है तो उसका फिर कोई भरोसा नहीं रहता। वह कोई भी गलत कदम उठा सकता है। और अपनी, परिवार की, समाज की या देश की बहुत बड़ी हानि भी कर सकता है। इसलिए ऐसी हानियों से बचने के लिए हार को भी सहन करना भी सीखें।"* सदा सबको इस प्रकार से विचार करना चाहिए, कि *"यदि जीत गए तो ठीक है। और यदि हार गए तो कोई बात नहीं।" "फिर भविष्य में पुरुषार्थ करेंगे और फिर कभी जीतेंगे।"* *"ऐसा सोचने वाला व्यक्ति कभी भी दुखी परेशान या विचलित नहीं होता। चाहे जीत हो, चाहे हार हो, वह हर परिस्थिति में खुश रहता है, उसका जीवन सफल हो जाता है।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

Post media

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!