
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
175 days ago
॥श्री सुर्य देवाय नम:॥ आदित्यस्य नमस्कारं ये कुर्वन्ति दिने दिने। आयु: प्रज्ञा बलं वीर्यं तेजस्तेषां च जायते॥ भावार्थ:- दैनन्दिन तथा नियमित सूर्यनमस्कार करनेसे आयु, प्रज्ञा, बल, पौरुषत्व तथा तेज वृद्धिंगत होता है सूर्य देव केवल प्रकाश के स्रोत नहीं हैं, बल्कि वे आरोग्य और ऊर्जा के भी अधिष्ठाता हैं। श्लोक का गहरा अर्थ आपने जो श्लोक साझा किया है, वह हमें बताता है कि सूर्य नमस्कार केवल एक शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि एक साधना है। इसके नियमित अभ्यास से मिलने वाले लाभ इस प्रकार हैं: * आयु: शरीर निरोगी रहता है, जिससे जीवन प्रत्याशा बढ़ती है। * प्रज्ञा: एकाग्रता और बुद्धिमत्ता में वृद्धि होती है। मन शांत और तीक्ष्ण बनता है। * बल और वीर्य: शारीरिक शक्ति और आंतरिक ओज (vitality) का विकास होता है। * तेज: चेहरे और व्यक्तित्व पर एक प्राकृतिक चमक आती है, जो आत्मविश्वास का प्रतीक है। सूर्य उपासना का महत्व आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, जहाँ मानसिक तनाव और विटामिन-D की कमी आम है, वहाँ सूर्यनमस्कार एक रामबाण की तरह काम करता है। यह हमारे शरीर के 'मणिपुर चक्र' (Solar Plexus) को सक्रिय करता है, जिससे रचनात्मकता और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है। > "आदित्य हृदयम पुण्यम सर्व शत्रु विनाशनम" — अर्थात् सूर्य की उपासना सभी बाधाओं और शत्रुओं (आंतरिक और बाहरी) का नाश करने वाली है। > 🌷 जय श्री सूर्य देव! 🌷

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