
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
163 days ago
राधा रानी की महिमा अनंत और अपार है। शास्त्रों और पुराणों में उन्हें 'ह्लादिनी शक्ति' कहा गया है, जो स्वयं श्री कृष्ण के आनंद का मूल हैं। उनके दिव्य स्वरूप और महिमा के कुछ प्रमुख पहलू इस प्रकार हैं: 1. प्रेम की पराकाष्ठा राधा जी का प्रेम 'निस्वार्थ' और 'विशुद्ध' है। भक्ति मार्ग में राधा-कृष्ण का प्रेम आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक माना जाता है। वे श्री कृष्ण की आराध्या हैं; कहा जाता है कि कृष्ण पूरी सृष्टि को मोहित करते हैं, लेकिन राधा जी स्वयं श्री कृष्ण को मोहित कर लेती हैं। 2. करुणा और दया की प्रतिमूर्ति राधा रानी को 'करुणामयी' कहा जाता है। भक्तों का विश्वास है कि श्री कृष्ण तक पहुँचने का सबसे सुलभ मार्ग राधा जी की शरण में जाना है। यदि कोई भक्त केवल 'राधे' नाम का जाप करता है, तो श्री कृष्ण उस पर सहज ही प्रसन्न हो जाते हैं। 3. 'राधा' नाम की शक्ति 'राधा' शब्द दो अक्षरों से बना है। 'रा' का अर्थ है दान या सिद्धि, और 'धा' का अर्थ है दौड़ना। जो अपने भक्तों की पुकार सुनकर उनकी ओर दौड़ पड़ती हैं, वही राधा हैं। नारद पुराण के अनुसार, राधा नाम का स्मरण करने मात्र से जीवन के समस्त विकार दूर हो जाते हैं। 4. ब्रज की अधिष्ठात्री देवी बरसाना और श्रीधाम वृंदावन राधा रानी के मुख्य लीला स्थल हैं। वे ब्रज की महारानी हैं। आज भी ब्रज में 'राधे-राधे' का संबोधन अभिवादन और जीवन का आधार है। > एक सुंदर भाव: > "कृष्ण प्रेममयी राधा, राधा प्रेममयी हरि।" > अर्थात—कृष्ण राधा के प्रेम में रमे हैं और राधा कृष्ण के प्रेम में। दोनों एक ही प्राण और दो देह के समान हैं। > राधे राधे जी 🙏
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