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18.5.2026 संसार में कुछ काम सही होते हैं, और बहुत से गलत। सही काम कम होते हैं, और गलत काम अधिक होते हैं। *"क्योंकि संसार में बुरे काम करने के फलस्वरूप पशु पक्षी कीड़े मकोड़े आदि प्राणियों की संख्या बहुत अधिक है। और अच्छे काम करने के फलस्वरूप मनुष्यों की संख्या बहुत कम है। ये अच्छे बुरे काम अनादि काल से चल रहे हैं, और आगे अनंत काल तक चलते रहेंगे।"* *"गलत कामों को आज तक सर्वज्ञ सर्वशक्तिमान परमात्मा भी नहीं रोक पाया, फिर आप कौन से खेत की मूली हैं, जो आप रोक लेंगे?" "यह वाक्य बोलकर मैं परमात्मा की निंदा नहीं करना चाहता। परमात्मा की शक्तिहीनता नहीं बताना चाहता। और आप जो सुधार का प्रयास कर रहे हैं, उस कार्य में आपका उत्साह भंग करना नहीं चाहता। आपके अंदर कोई निराशा के भाव उत्पन्न करना नहीं चाहता। और न ही मैं निराश हूं। इसका प्रमाण यह है, कि मैं स्वयं 365 दिन समाज सुधार के लिए पूरे उत्साह के साथ पूर्ण पुरुषार्थ करता हूं। वर्ष भर में एक भी छुट्टी नहीं मनाता।"* *"संसार में पाप कर्म बंद नहीं होंगे',* यह बात कहकर मैं आपको यह समझाना चाहता हूं, कि *"प्रत्येक व्यक्ति कर्म करने में स्वतंत्र है। वह अपनी इच्छा और अपनी बुद्धि से ही काम करता है। जैसे आप भी अपने सब काम अपनी इच्छा और अपनी बुद्धि से करते हैं। ऐसे ही दूसरे लोग भी करते हैं। काम चाहे अच्छा हो चाहे बुरा हो, लोगों को इस बात की परवाह नहीं है। लोग तो बस अपनी इच्छा और अपनी बुद्धि के हिसाब से ही काम करना चाहते हैं, और करते हैं।"* *"यदि ईश्वर चाहे, तो सब बुरे कामों को एक झटके में रोक सकता है। परंतु ऐसा करना सब लोगों के साथ अन्याय होगा। ईश्वर न्यायकारी है, इसलिए किसी भी अपराधी का हाथ नहीं पकड़ता, कि उसे ग़लत काम करने ही न दे।"* *"क्योंकि जब आत्मा स्वभाव से कर्म करने में स्वतंत्र है, और ईश्वर उसकी स्वाभाविक स्वतंत्रता को यदि छीन ले, उसे अपनी स्वतंत्रता से कोई बुरा काम करने ही न दे, तो क्या यह उसके साथ अन्याय नहीं होगा?" "ईश्वर अन्यायकारी नहीं है। वह किसी की स्वतंत्रता को नहीं छीनता। इसीलिए पाप करते समय किसी को जबरदस्ती नहीं रोकता।"* हां, दयालु होने के कारण सबके मन में भय शंका लज्जा के भाव उत्पन्न कर के सबको सूचना अवश्य देता है, कि *"भाइयो! बुरे काम मत करो, अन्यथा आपको दंड मिलेगा। अच्छे काम करो, तो मैं आपको सुख दूंगा।" "क्या लोग सर्वज्ञ सर्वशक्तिमान ईश्वर के इस सुझाव को मान लेते हैं? नहीं मानते।"* *"जब लोग सर्वज्ञ सर्वशक्तिमान ईश्वर के सुझाव को भी नहीं मानते और अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग करते हैं, फिर भी बुरे काम करते हैं, तो आपका सुझाव तो लोग क्या ही मानेंगे? आपका ज्ञान और शक्ति ईश्वर के सामने क्या है? कुछ भी नहीं है।"* *"इसलिए संसार की अधिक चिंता न करें। यह काम राजा लोगों का है। प्रशासनिक अधिकारी लोग बुरे कामों को अवश्य रोकें। यह उनका क्षेत्र है। आम जनता को इस विषय में ज्यादा सोचने की आवश्यकता नहीं है।" "हां, दुष्टों तथा अत्याचारियों से अपना बचाव तो अवश्य करें।" "और राजा लोग भी अपराधों को रोकने का पूरा प्रयत्न अवश्य करें। परन्तु फिर भी यह न समझें, कि सारे अपराध समाप्त हो जाएंगे। क्योंकि सबके अंदर अविद्या और स्वार्थ बहुत अधिक मात्रा में भरा पड़ा है, जिसके कारण संसार में सारे पाप होते हैं। उस अविद्या और स्वार्थ को पूरी तरह से हटाना बहुत कठिन है।"* संसार में पहले भी बुरे काम होते थे, और आगे भी होते रहेंगे। इसका प्रमाण यह है, कि *"पहले भी पशु पक्षी कीड़े मकोड़े कुत्ते गधे वृक्ष वनस्पति आदि पैदा होते थे। आज भी होते हैं, और आगे भी होते रहेंगे। ये सब योनियां पाप कर्मों का फल है। इसलिए पूरी तरह से पाप को कोई नहीं रोक सकता।"* तो मुख्य बात यह है, कि *"संसार में जो बुरे काम हो रहे हैं, उन पर अधिक ध्यान न दें। उन कामों से, तथा उनके दुष्परिणामों से अपनी रक्षा तो अवश्य करें। परंतु उन्हें सोच सोच कर दुखी न हों। परेशान न हों, अन्यथा आप स्वयं डिप्रेशन में चले जाएंगे, और आपका जीवन नष्ट हो जाएगा। अतः अपना सोचने का दृष्टिकोण बदलें।"* ऐसे सोचें -- *"क्या संसार में कुछ अच्छे काम भी हो रहे हैं? यदि हां, तो उन अच्छे कार्यों को देख देखकर अपना उत्साह बढ़ाएं।" "इससे आपका मन प्रसन्न एवं प्रफुल्लित रहेगा, और आप भी आगे अच्छे-अच्छे काम करेंगे। इससे आप आनंद से जीवन जिएंगे। आपका यह जन्म भी सुखमय होगा, और अगला जन्म भी आप को अच्छे मनुष्य का मिलेगा।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक निदेशक दर्शन योग महाविद्यालय रोजड़ गुजरात।"*

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Comments (1)

सविता

सविता

May 18, 2026

om namah shivay 🙏🌹