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29.4.2026 पिछले 20 25 वर्षों से, जब से यह इलैक्ट्रोनिक एवं सोशल मीडिया का युग तेजी से चल रहा है, भौतिकवाद और भोगवाद की आंधी सी आई हुई है। *"तब से लोग अपने पुराने उत्तम गुणों को भूल से गए हैं। सभ्यता नम्रता सेवा अनुशासन परोपकार दान दया सहनशक्ति इत्यादि गुणों को छोड़ सा दिया है। इसी का दुष्परिणाम है कि लोगों में लोभ क्रोध ईर्ष्या द्वेष अभिमान आदि दोष बहुत बढ़ गए हैं। छोटी-छोटी बात भी दूसरों की सहन नहीं होती।"* *"भोगवाद की इस आंधी में बिना गुण कर्म स्वभाव मिलाए, केवल रूप रंग और कुछ पैसा आदि देखकर लोग विवाह कर लेते हैं। एक दूसरे के गुण कर्म स्वभाव की पूरी पहचान नहीं करते। फिर जब छोटी-छोटी बात में परस्पर मतभेद होता है, तो तुनक जाते हैं। सहन नहीं करते।"* *"पहले छोटे-छोटे झगड़े आरंभ होते हैं। कुछ समय में अभिमान के कारण और सहनशक्ति कम होने के कारण झगड़े बढ़ जाते हैं। और कुछ ही दिनों में संबंध टूट जाते हैं।"* कोई कितने भी गुण कर्म स्वभाव मिला ले, फिर भी देखा तो यही जाता है, कि *"संसार में कोई भी दो व्यक्ति ऐसे नहीं मिलते, जिनके विचार 100% एक समान हों। कुछ न कुछ तो मतभेद होता ही है।"* मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह अकेला नहीं जी सकता। इसलिए आपस में मिलजुल कर परिवार और समाज में रहना पड़ता है। इसका उपाय यही है, कि *"अपनी सहनशक्ति को बढ़ाएं। अधिक भोगवादी न बनें। उसमें कहीं पूरी तृप्ति नहीं है। शांति नहीं है, संतोष नहीं है।"* ऊपर बताए सभ्यता नम्रता सहनशक्ति आदि गुणों को धारण करके लोग कुछ अच्छे ढंग से अपना जीवन जी सकते हैं। जैसे कि *"सुबह शाम बैठकर ईश्वर का ध्यान करें। वेदों का अध्ययन करें। ऋषियों के ग्रंथ पढ़ें। थोड़ा व्यायाम करें। दिनचर्या ठीक रखें। रात को जल्दी सोएं। सुबह जल्दी उठें। जहां कहीं छोटी बड़ी बातों में मतभेद हो जाए, उसको आपस में बैठकर चर्चा से सुलझाएं। अपनी सहनशक्ति बढ़ाएं, इत्यादि।"* *"मिथ्या अभिमान और हठ दुराग्रह आदि दोषों के कारण संसार में असंख्य लोग पहले भी दुखी हुए हैं, आज भी दुखी हैं, और आगे भी होते रहेंगे।"* *"अतः इन दोषों को छोड़ने का प्रयत्न करें। तथा ऊपर बताए उत्तम गुणों को धारण करें। तभी आपका व्यक्तिगत पारिवारिक सामाजिक जीवन सुखमय हो सकता है, अन्यथा नहीं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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Comments (2)

Lal  Singh 🇮🇳🇮🇳

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳

Apr 29, 2026

राधे राधे जी 🙏

सविता

सविता

Apr 29, 2026

Radhe radhe 🙏🌹