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*एक अच्छी किताब* *कितनी भी पुरानी हो जाए..* *उसके शब्द नही बदलते,* *अच्छे रिश्तों की भी* *यही खासियत है।* किताब और रिश्तों की यह तुलना वाकई लाजवाब है। जिस तरह एक अच्छी किताब के पन्ने समय के साथ पीले पड़ सकते हैं, लेकिन उसका ज्ञान और उसके शब्द हमेशा अडिग रहते हैं, वैसे ही सच्चे रिश्ते वक्त की हर आंधी को झेल लेते हैं और उनकी गहराई कभी कम नहीं होती। आज का सुविचार > "शब्दों का वजन तो बोलने वाले के भाव पर निर्भर करता है, > वरना 'सुप्रभात' तो पूरा शहर बोलता है।" > आपका दिन मंगलमय और ऊर्जा से भरा हो। शुभप्रभात! 🙏

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