
SHREE SHARMA
43 days ago
1. रोम-रोम में राम हैं: इस पंक्ति का अर्थ है कि हनुमान जी के शरीर के प्रत्येक कण और प्रत्येक सांस में केवल भगवान श्री राम का नाम और उनका वास है। यह उस प्रसंग की याद दिलाता है जब हनुमान जी ने अपनी छाती चीरकर दिखाई थी और उनके हृदय में सिया-राम की छवि दिखाई दी थी। उनकी भक्ति बाहरी दिखावा नहीं, बल्कि उनके पूरे अस्तित्व में रची-बसी है। 2. उर में सिय की आस: हनुमान जी के हृदय (उर) में हमेशा माता सीता के प्रति अगाध श्रद्धा है और वे सदैव यही कामना करते हैं कि सिया-राम की जोड़ी उनके हृदय में सदा मुस्कुराती रहे। माता सीता ने भी हनुमान जी को अपने पुत्र के समान माना था, इसलिए हनुमान जी के मन में माता सीता के प्रति एक निश्छल और पवित्र आस रहती है। 3. अंजनी-नंदन के सिवा, कौन अनोखा दास: संसार में बहुत से भक्त और सेवक हुए हैं, लेकिन हनुमान जी जैसा अनोखा और विलक्षण दास कोई दूसरा नहीं है। उन्होंने प्रभु राम की सेवा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। संकटमोचन बनकर उन्होंने प्रभु के हर कार्य को सिद्ध किया, लेकिन बदले में कभी किसी धन, पद या प्रतिष्ठा की इच्छा नहीं की। उनका दास-भाव (सेवक रूप) नि:स्वार्थ भक्ति की पराकाष्ठा है। मुख्य संदेश यह दोहा हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति में कोई अहंकार नहीं होता। हनुमान जी सर्वशक्तिमान होते हुए भी स्वयं को हमेशा श्री राम का एक छोटा सा 'दास' ही मानते हैं। उनका संपूर्ण जीवन ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक है।

Comments (4)

Rama Devi Sahu
Jul 18, 2026
🙏🏹 Jai Shree Ram 🏹🙏

Renu sharma
Jul 18, 2026
Jai shree ram jai hanuman ji

बरखा शर्मा
Jul 18, 2026
jay Vir hanuman ji 🙏🌹
