
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
334 days ago
*अच्छी थी, पगडंडी अपनी।* *सड़कों पर तो, जाम बहुत है।।* *फुर्र हो गई फुर्सत, अब तो।* *सबके पास, काम बहुत है।।* *नहीं जरूरत, बूढ़ों की अब।* *हर बच्चा, बुद्धिमान बहुत है।।* *उजड़ गए, सब बाग बगीचे।* *दो गमलों में, शान बहुत है।।* *मट्ठा, दही, नहीं खाते हैं।* *कहते हैं, ज़ुकाम बहुत है।।* *पीते हैं, जब चाय, तब कहीं।* *कहते हैं, आराम बहुत है।।* *बंद हो गई, चिट्ठी, पत्री।* *फोनों पर, पैगाम बहुत है।।* *आदी हैं, ए.सी. के इतने।* *कहते बाहर, गर्मी बहुत है।।* *झुके-झुके, स्कूली बच्चे।* *बस्तों में, सामान बहुत है।।* *नही बचे, कोई रिश्तेदार ।* *अकड़ का, एहसास बहुत है।।* *सुविधाओं का, ढेर लगा है।* *पर इंसान, परेशान बहुत है।।* *💐💐सपनों का सच💐💐* 👇👇👇👇 *यह कहानी है संघर्ष, विश्वास और परिवार के रिश्तों की।* जब जिम्मेदारियों के बीच अपने सपनों को पूरा करना मुश्किल लगे, तब हौसला और सच्चा साथ ही इंसान को आगे बढ़ने की ताकत देता है। *💐👍 शुभ प्रभात बंदन जी 🙏 👍*💐

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