
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
103 days ago
परिचय और नाम का अर्थ मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग एक अद्वितीय स्थान है क्योंकि यह ज्योतिर्लिंग होने के साथ-साथ माता सती के ५१ शक्तिपीठों में से भी एक है। यहाँ माता सती के ओष्ठ (होठ) गिरे थे। 'मल्लिकार्जुन' शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है—'मल्लिका' जिसका अर्थ माता पार्वती है और 'अर्जुन' जिसका अर्थ भगवान शिव है। यहाँ महादेव और माता पार्वती दोनों एक साथ निवास करते हैं। ज्योतिर्लिंग की स्थापना की मुख्य कथा मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की स्थापना के पीछे शिव-पुत्रों के बीच हुआ एक रोचक विवाद है: प्रतियोगिता की शुरुआत: कार्तिकेय और गणेश जी के बीच इस बात को लेकर विवाद हुआ कि दोनों में से श्रेष्ठ कौन है और किसका विवाह पहले होना चाहिए। माता पार्वती ने इसका निर्णय करने के लिए एक प्रतियोगिता रखी। शर्त यह थी कि जो भी पृथ्वी की सात परिक्रमाएँ सबसे पहले पूरी करके लौटेगा, उसका विवाह पहले होगा। कार्तिकेय की यात्रा: कार्तिकेय तुरंत अपने वाहन मोर पर सवार होकर तीव्र गति से पृथ्वी की परिक्रमा करने निकल गए। गणेश जी की चतुर बुद्धि: गणेश जी का शरीर भारी था और उनका वाहन मूषक (चूहा) था, इसलिए उन्होंने अपनी बुद्धि का प्रयोग किया। उन्होंने वहीं बैठे माता पार्वती और भगवान शिव की सात परिक्रमाएँ कर लीं। जब शिव जी ने इसका कारण पूछा, तो गणेश जी ने कहा कि माता-पिता में ही पूरा ब्रह्मांड समाहित है, इसलिए उनकी परिक्रमा पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा के समान है। गणेश जी का विवाह: इस बुद्धिमत्ता से प्रसन्न होकर देवताओं की सहमति से गणेश जी को प्रथम पूज्य और विजेता घोषित किया गया। उनका विवाह रिद्धि और सिद्धि नाम की दो कन्याओं से हुआ, जिनसे उन्हें क्षेम और लाभ नाम के दो पुत्र मिले। कार्तिकेय का क्रोध और क्रौंच पर्वत गमन: जब कार्तिकेय परिक्रमा पूरी करके लौटे और गणेश जी को उनकी पत्नियों और बच्चों के साथ देखा, तो वे बहुत क्रोधित हुए। उन्होंने तर्क दिया कि यह प्रतियोगिता शारीरिक बल की थी, बुद्धि की नहीं। माता-पिता के बहुत समझाने पर भी वे नहीं माने और रूठकर क्रौंच पर्वत (वर्तमान श्रीशैलम पर्वत) पर चले गए। ज्योतिर्लिंग की स्थापना: पुत्र के विरह में दुखी होकर माता पार्वती और शिव जी ने पहले सप्तर्षियों और फिर नारद जी को उन्हें मनाने भेजा, लेकिन कार्तिकेय नहीं लौटे। अंत में जब शिव-पार्वती स्वयं वहां पहुँचे, तो कार्तिकेय मर्यादावश उनसे दूर तीन योजन आगे एक अन्य पर्वत पर चले गए। अपने पुत्र को न पाकर, माता-पिता उसी क्रौंच पर्वत पर 'मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग' के रूप में स्थापित हो गए। मान्यता है कि आज भी हर पूर्णिमा को माता पार्वती और अमावस्या को भगवान शिव अपने पुत्र कार्तिकेय को देखने वहाँ आते हैं। राधे राधे

Comments (1)

R k jangid phulera Jaipur
May 18, 2026
जय भोलेनाथ की शुभ रात्रि 🌹🙏
