MyMandirInstall

रूस का **कोला सुपरडीप बोरहोल (Kola Superdeep Borehole)** इंसान द्वारा पृथ्वी में किया गया अब तक का सबसे गहरा छेद है। यह इंजीनियरिंग का एक ऐसा चमत्कार है जिसने हमें पृथ्वी की सतह के नीचे छिपे कई रहस्यों से रूबरू कराया। यहाँ इसके इतिहास और मुख्य पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी गई है: ### 1. प्रोजेक्ट की शुरुआत (1970) शीत युद्ध (Cold War) के दौरान, अमेरिका और सोवियत संघ के बीच केवल अंतरिक्ष (Space Race) में ही नहीं, बल्कि ज़मीन के अंदर गहराई तक पहुँचने की भी होड़ लगी थी। सोवियत संघ ने **24 मई 1970** को रूस के कोला प्रायद्वीप (Kola Peninsula) पर इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की। उनका लक्ष्य पृथ्वी की ऊपरी परत जिसे **'क्रस्ट' (Crust)** कहते हैं, की गहराई को समझना था। ### 2. गहराई के कीर्तिमान वैज्ञानिकों ने यहाँ कई बोरहोल खोदे, जिनमें से सबसे गहरा **'SG-3'** था। * **1979:** इसने अमेरिका के 'बर्टा रोजर्स' (Bertha Rogers) होल का रिकॉर्ड तोड़ा। * **1989:** यह **12,262 मीटर (करीब 12.2 किलोमीटर)** की गहराई तक पहुँच गया। यह छेद इतना गहरा है कि अगर आप इसमें कोई पत्थर गिराएं, तो उसे नीचे तक पहुँचने में लगभग 40-50 सेकंड लगेंगे। ### 3. प्रमुख वैज्ञानिक खोजें इस खुदाई से कुछ ऐसी जानकारियां मिलीं जिन्होंने विज्ञान की पुरानी धारणाओं को बदल दिया: * **पानी की मौजूदगी:** करीब 7 किलोमीटर की गहराई पर वैज्ञानिकों को पानी मिला। पहले माना जाता था कि इतनी गहराई पर पानी नहीं हो सकता, लेकिन यहाँ चट्टानों से रिसता हुआ खनिज युक्त पानी पाया गया। * **सूक्ष्म जीव (Fossils):** 6 किलोमीटर की गहराई पर 2 अरब साल पुराने सूक्ष्म जीवों के जीवाश्म (Microscopic fossils) मिले, जो इतनी अधिक गर्मी और दबाव में भी सुरक्षित थे। * **ग्रेनाइट और बेसाल्ट:** पहले वैज्ञानिकों का मानना था कि क्रस्ट के नीचे ग्रेनाइट के बाद बेसाल्ट की परत होगी, लेकिन उन्हें वहां केवल टूटी हुई और बदली हुई ग्रेनाइट की परतें ही मिलीं। ### 4. खुदाई क्यों रुकी? (चुनौतियां) 1990 के दशक की शुरुआत में खुदाई का काम रोकना पड़ा। इसके मुख्य कारण थे: * **अत्यधिक तापमान:** 12 किमी की गहराई पर तापमान **180°C** तक पहुँच गया था, जबकि वैज्ञानिकों ने केवल 100°C का अनुमान लगाया था। इतनी गर्मी में ड्रिलिंग मशीनें और उपकरण काम करना बंद कर रहे थे। * **चट्टानों का व्यवहार:** इतनी गहराई पर चट्टानें ठोस पत्थर की तरह नहीं बल्कि "प्लास्टिक" की तरह व्यवहार करने लगी थीं, जिससे छेद को खुला रखना नामुमकिन हो गया था। * **फंड की कमी:** सोवियत संघ के विघटन के बाद आर्थिक संकट के कारण 1992 में ड्रिलिंग बंद कर दी गई और 2005 में इस साइट को पूरी तरह सील कर दिया गया। ### 5. "नर्क का द्वार" (The Urban Legend) कोला सुपरडीप बोरहोल से जुड़ी एक मशहूर अफवाह भी है। कहा जाता है कि जब ड्रिल 12 किमी नीचे पहुँची, तो वैज्ञानिकों ने माइक्रोफोन नीचे उतारे और उन्हें वहां से लाखों लोगों के चिल्लाने और चीखने की आवाजें सुनाई दीं, जिसके कारण इसे **"नर्क का द्वार" (Well to Hell)** कहा जाने लगा। हालांकि, वैज्ञानिकों ने इसे पूरी तरह गलत बताया है, क्योंकि इतनी गर्मी में कोई भी माइक्रोफोन काम नहीं कर सकता था। ### वर्तमान स्थिति आज यह जगह एक खंडहर बन चुकी है। बोरहोल को एक भारी धातु के ढक्कन से वेल्ड करके बंद कर दिया गया है। हालांकि 2008 में कतर में और 2011 में रूस के सखालिन द्वीप पर इससे *लंबे* (लंबाई में ज्यादा) तेल के कुएं खोदे गए, लेकिन **लंबवत गहराई (Vertical Depth)** के मामले में आज भी कोला सुपरडीप बोरहोल दुनिया का सबसे गहरा कृत्रिम बिंदु है।

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!