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12.9.2026 *"बहुत से लोग स्वयं को बहुत अधिक बुद्धिमान मानते हैं, और दूसरे अधिक बुद्धिमानों को भी अपने से कम बुद्धिमान अथवा मूर्ख समझते हैं। ऐसे लोग जीवन में कभी सफल नहीं हो सकते।"* *"जब कोई व्यक्ति अपने आप को दूसरे व्यक्ति से अधिक बुद्धिमान समझने लगता है, जबकि वह उतना बुद्धिमान होता नहीं है, तब वह अपने अभिमान के कारण दूसरे अधिक बुद्धिमान के साथ उचित व्यवहार नहीं करता।" "जब कोई व्यक्ति दूसरों के साथ उचित व्यवहार नहीं करता, तो उसका परिणाम भी उसे भोगना पड़ेगा। और वह दूसरे अधिक बुद्धिमान व्यक्ति से जितना लाभ ले सकता था, उतना नहीं ले पाएगा।"* *"अभिमान करने के कारण उसकी बुद्धि और भी अधिक नष्ट हो जाती है, तथा जब वह केवल अपनी बुद्धि से ही सारे निर्णय लेने लगता है, तो एक के बाद एक गलत निर्णय लेता रहता है। उससे उसकी बहुत सी हानियां होती हैं। इसका परिणाम यह होता है, कि वह अपने जीवन में असफल हो जाता है।" "अतः दूसरे अधिक बुद्धिमान लोगों से, स्वयं को अधिक बुद्धिमान न समझें।" *"जो आपसे छोटे हैं, कम योग्य हैं, उनसे तो आप स्वयं को अधिक बुद्धिमान समझ सकते हैं। परन्तु जो आपसे अधिक बुद्धिमान हैं, उनको अपने से अधिक बुद्धिमान ही समझें, और उनकी सलाह पर विशेष ध्यान दें। तभी आप जीवन में सुखी और सफल हो पाएंगे, अन्यथा नहीं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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