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*🎍ॐ नमो परमात्मने 🎍* *"कृपा का स्वरूप"* 〰️〰️〰️⛳⛳〰️〰️〰️ *🌞प्रायः लोग भौतिक सुख साधनों की प्राप्ति को ही दैवीय कृपा समझते हैं। केवल भौतिक उपलब्धियों को प्रभु कृपा का स्वरूप नहीं समझना चाहिए। कृपा का वास्तविक अर्थ बाहर की प्राप्ति नहीं अपितु भीतर की तृप्ति है। किसी को भौतिक सुखों की प्राप्ति हो जाना यह कृपा हो न हो लेकिन किसी को बाहरी सुखों की प्राप्ति न होने पर भी भीतर एक तृप्ति बनी रहना यह अवश्य प्रभु की बड़ी कृपा है।* *🌞जिस जीवन में प्रभु चरणों का विश्वास होगा वहाँ रिक्तता नहीं हो सकती है, वहाँ तो आनंद ही आंनद होता है। आपके पुरुषार्थ से और प्रारब्ध से आपको प्राप्ति तो संभव है, लेकिन तृप्ति नहीं, वह तो केवल और केवल प्रभु कृपा से ही संभव है। अतः भीतर की तृप्ति, भीतर की धन्यता और भीतर का अहोभाव, यही उस प्रभु की सबसे बड़ी कृपा है। अभाव में भी स्वभाव में प्रसन्न एवं आनंदित रहना ही तो कृपा का स्वरूप है-..!!!* *🌹 जय माता दी 🌹🙏*

Comments (3)

Radhe Radhe null

Radhe Radhe

Sep 15, 2025

🌹🌹 गुड इवनिंग शुभ संध्या जी भाई जी।। शुभ सोमवार शाम की हार्दिक शुभकामनाएं।।🌹🌹

Radhe Radhe null

Radhe Radhe

Sep 15, 2025

🥀💅❤️👌🔹 वेरी वेरी नाइस सभी पोस्ट बहुत ही, अच्छे *हैं* जी भाई जी।।🔹👌❤️💅🥀

Radhe Radhe null

Radhe Radhe

Sep 15, 2025

🙏🙏🙏🙏🙏