
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
182 days ago
1.3.2026 मनुष्य, जो 'प्राणी' कहलाता है, वह न तो केवल शरीर है, और न केवल आत्मा; बल्कि वह इन दोनों का समुदाय है। *"यद्यपि शरीर और आत्मा दोनों अलग-अलग पदार्थ हैं। शरीर जड़ है, और आत्मा चेतन। परंतु ये दोनों अकेले-अकेले कुछ नहीं कर पाते। दोनों को एक दूसरे की सहायता की आवश्यकता होती है।"* इन दोनों में मुख्य तत्व तो आत्मा है, शरीर उसका साधन है। *"शरीर की सहायता से आत्मा कर्म करता है, और अपने कर्मों का फल भोगता है। जब आत्मा शरीर में होता है, तब वह 'प्राणी' कहलाता है, मनुष्य पशु पक्षी इत्यादि।"* जब मनुष्य प्राणी कार्य करता है, तो उसे दोनों प्रकार की थकान होती है, शरीर की भी और आत्मा की भी। मनुष्य को स्वस्थ रहने के लिए विश्राम तथा दोनों प्रकार का भोजन चाहिए। *"शरीर के लिए दाल रोटी सब्जी इत्यादि। तथा आत्मा के लिए ज्ञान विज्ञान एवं सुख या आनन्द। जब यह दोनों प्रकार का भोजन मिलता है, तभी दोनों स्वस्थ रह सकते हैं।"* तो मनुष्य को अपना जीवन सफल बनाने के लिए दोनों को स्वस्थ रखना आवश्यक है। *"शरीर के स्वास्थ्य के लिए प्रतिदिन थोड़ा व्यायाम करना चाहिए। शाकाहारी भोजन करना चाहिए, और उचित मात्रा में अर्थात 6/7 घंटे विश्राम करना चाहिए।"* *"आत्मा को स्वस्थ बनाए रखने के लिए वेदों का अध्ययन करना चाहिए। जिससे उसे शुद्ध ज्ञान की प्राप्ति हो। और ईश्वर का ध्यान करना चाहिए, जिससे कि उसे सुख या आनन्द मिल सके।"* *"जो व्यक्ति इस प्रकार से अपना जीवन जीता है, वह शरीर और आत्मा दोनों तरह से स्वस्थ रहता है, और वही व्यक्ति सुखी होता है।"* *"आप भी यदि सुखी होना चाहते हों, तो ऊपर बताई बातों का पालन करें।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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