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*🌞सुप्रभातम🌞* *जय महेश* *🇮🇳भारत माता की जय🇮🇳* दिनांक १७ सितम्बर २०२५ दिन बुधवार विक्रमी संवत २०८२ शक संवत १९४७ सूर्य दक्षिणायन दक्षिणगोल वर्षा ऋतु अश्विन मास कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि २३:३९ तक फिर द्वादशी तिथि पुनर्वसु नक्षत्र ०६:२५ तक फिर पुष्य नक्षत्र परिघ योग २२:५४ तक फिर शिव योग कर्क राशि में चन्द्रमा *इंदिरा एकादशी व्रत सबका* *श्री विश्वकर्मा पूजन दिवस* *आज का सुविचार* *प्रेम बांटा गया तो "रामायण" लिखी गई और संपति बाँटी गयी तो "महाभारत' कल भी यही सत्य था और आज भी..!!* 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 *नवरात्रि में अखंड दीपक का महत्व- लाभ - भाग १* *AKHAND DEEPAK IN NAVRATRI – IMPORTANCE AND BENEFITS - PART 1* *नवरात्रि में अखंड दीपक केवल पूजा-विधि नहीं, बल्कि देवी दुर्गा व लक्ष्मी की अखंड कृपा का प्रतीक है। यह घर में धन-धान्य, सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का सेतु बनता है।* नवरात्रि में अखंड दीपक प्रज्वलन का अर्थ है – "देवी शक्ति का अखंड आह्वान और साधना का निरंतर प्रवाह"। *कारण और महत्व* 1 *देवी-शक्ति का स्मरण* मान्यता है कि जहाँ अखंड दीपक जलता है, वहाँ देवी का सूक्ष्म निवास रहता है। इसलिए हर बार दीपक को देखकर भक्त को लगता है कि वह सीधे माता के सान्निध्य में है। 2 *ऊर्जा का केंद्र* -अखंड दीप एक ब्रह्माण्डीय ऊर्जा केंद्र की तरह काम करता है। -उससे उठने वाली आभा और स्पंदन पूरे घर में शक्ति, शांति और सकारात्मकता फैलाते हैं। 3 *ग्रह दोष निवारण* -लगातार जलता दीप शनि, राहु, केतु व चन्द्र दोष को शांत करता है। -विशेषकर तिल का तेल या घी का दीपक शुभ माना जाता है। 4 *माँ लक्ष्मी का सूक्ष्म वास* -अग्नि को लक्ष्मी का आवास माना गया है। -अखंड दीपक से घर में संपन्नता और समृद्धि की ऊर्जा बनी रहती है। 5 *संरक्षण व कृपा* -जहाँ अखंड दीपक जलता है वहाँ देवी का सूक्ष्म निवास माना जाता है। -वह स्थान दैवीय संरक्षण और कृपा से आच्छादित रहता है। 6 *राजयोग व समृद्धि* -नवरात्रि में नौ दिन तक अखंड दीपक जलाना महालक्ष्मी राजयोग का कारक माना गया है। इसका फल: *आर्थिक स्थिरता,* *व्यवसाय में उन्नति,* *रुके हुए कार्यों में सफलता।* 7 *पारिवारिक व मानसिक लाभ* -घर-परिवार में एकता, शांति और सौहार्द बढ़ता है। -दीपक की लौ ध्यान को केंद्रित कर आत्मबल और सकारात्मक सोच को प्रबल करती है। -नियमित ध्यान या जप करने वालों के लिए यह ऊर्जा संचारक का कार्य करता है। *दीपक की व्यवस्था* *स्थान:* पूजा घर या कलश के पास रखें। *ईंधन:* शुद्ध घी (सर्वश्रेष्ठ) या तिल का तेल। *बाती:* लाल/पीले कपास की। *नियम:* दीपक दिन-रात जलता रहे, कभी बुझना नहीं चाहिए। *अखंड दीप मंत्र* *दीपो ज्योतिर्मयी देवी, दीपे ते जायतां प्रभा।* *अखंड ज्योति साध्यायै, भक्ते: कृपां कुरु शुभे॥* *भावार्थ:* *हे दीप स्वरूपिणी देवी तेरी ज्योति से अखंड प्रकाश फैले,* *यह अखंड ज्योति मेरी साधना को सिद्ध करे, और भक्त पर अपनी कृपा बनाए रख।* *सार* -नवरात्रि के नौ दिनों में अखंड दीपक एक जीवंत साधना-बिन्दु है। -भक्त चाहे घर के किसी भी कोने में हों, मन बार-बार दीपक की ओर जाता है -यह निरंतर भक्ति, ध्यान और ऊर्जा का चक्र बनाता है, जो नवरात्रि साधना का सबसे बड़ा लाभ है। NOTE-- इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं धार्मिक आस्था, प्रवचनों ,धार्मिक ग्रंथो/ ज्योतिष मान्यताओं पर आधारित हैं | 🛕🛕🛕🛕🛕🛕🛕🛕🛕

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