
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
11 days ago
19.8.2026 *"माता-पिता घर में प्रशासन चलाते हैं।अध्यापक प्रिंसिपल आदि स्कूल कॉलेज में। कंपनियों में भी अधिकारी लोग होते हैं, जो वहां का प्रशासन चलाते हैं। गांव में पंचायत और नगर में न्यायालय। ये सब अपने-अपने क्षेत्र में प्रशासन चलाते हैं।"* यदि उनके अपने-अपने क्षेत्र में कोई लोग दोष करते हैं त्रुटियां करते हैं, तो इन अधिकारियों का कर्तव्य है, कि *"वे उनको पहले प्रेम से समझाएं, कि आप इस प्रकार की गलतियां ना करें।"* यदि वे लोग मान लेते हैं, तो ठीक है। और समझाने पर भी यदि वे नहीं मानते, तो उन्हें दंड की चेतावनी देनी चाहिए। *"और यदि वे लोग चेतावनी से भी न सुधरें, तो उन्हें दंड अवश्य ही देना चाहिए।" क्योंकि यह नियम है कि "दंड के बिना कोई सुधरता नहीं है." "इस प्रकार से दंड देकर उनका सुधार करना अहिंसा है। क्योंकि न्याय करना ही अहिंसा है। और अपराधी को दंड देना न्याय है। इसलिए इसको अहिंसा के रूप में स्वीकार करना चाहिए। तभी आप आपका परिवार समाज देश और दुनियां सुख शांति से जी पाएगी, अन्यथा नहीं।"* *"अहिंसा ही सुख शांति का उपाय है, जिसमें अपराधी को दंड देना भी सम्मिलित है।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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