
SHREE SHARMA
351 days ago
#पतिव्रता_गान्धारी संसारकी पतिव्रता देवियोंमें गान्धारीका विशेष स्थान है। ये गन्धर्वराज सुबलकी पुत्री और शकुनिकी बहन थीं। इन्होंने कौमार्यावस्थामें भगवान् शंकरकी आराधना करके उनसे सौ पुत्रोंका वरदान प्राप्त किया था। जब इनका विवाह नेत्रहीन धृतराष्ट्रसे हुआ, तभीसे इन्होंने अपनी आँखोंपर पट्टी बाँध ली। इन्होंने सोचा कि जब हमारे पति नेत्रहीन हैं, तब मुझे भी संसारको देखनेका अधिकार नहीं है। पतिके लिये इन्द्रियसुखके त्यागका ऐसा उदाहरण अन्यत्र नहीं मिलता। इन्होंने ससुरालमें आते ही अपने श्रेष्ठ आचरणसे पति एवं उनके परिवारको मुग्ध कर दिया। देवी गान्धारी पतिव्रता होनेके साथ अत्यन्त निर्भीक और न्यायप्रिय महिला थीं। इनके पुत्रोंने जब भरी सभामें द्रौपदीके साथ अत्याचार किया, तब इन्होंने दुःखी होकर उसका खुला विरोध किया। जब इनके पति महाराज धृतराष्ट्रने दुर्योधनकी बातोंमें आकर पाण्डवोंको दुबारा द्यूतके लिये आमन्त्रित किया, तब इन्होंने जुएका विरोध करते हुए अपने पतिदेवसे कहा— 'स्वामी ! दुर्योधन जन्म लेते ही गीदड़की तरहसे रोया था। उसी समय परम ज्ञानी विदुरजीने उसका त्याग कर देनेकी सलाह दी थी। मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि यह कुल-कलङ्क कुरुवंशका नाश करके ही छोड़ेगा। आप अपने दोषोंसे सबको विपत्तिमें मत डालिये। इन ढीठ मूर्खाकी हाँ-में-हाँ मिलाकर इस वंशके नाशका कारण मत बनिये। कुलकलङ्क दुर्योधनको त्यागना ही श्रेयस्कर है। मैंने मोहवश उस समय विदुरकी बात नहीं मानी, उसीका यह फल है। राज्यलक्ष्मी क्रूरके हाथमें पड़कर उसीका सत्यानाश कर देती हैं। बिना विचारे काम करना आपके लिये बड़ा दुःखदायी सिद्ध होगा।' गान्धारीकी इस सलाहमें धर्म, नीति और निष्पक्षताका अनुपम समन्वय है। जब भगवान् श्रीकृष्ण सन्धिदूत बनकर हस्तिनापुर गये और दुर्योधनने उनके प्रस्तावको ठुकरा दिया तथा बिना युद्धके सूईके अग्रभर भी जमीन देना स्वीकार नहीं किया। इसके बाद गान्धारीने उसको समझाते हुए कहा— 'बेटा ! मेरी बात ध्यानसे सुनो। भगवान् श्रीकृष्ण, भीष्म, द्रोणाचार्य तथा विदुरजीने जो बातें तुमसे कही हैं, उन्हें स्वीकार करनेमें ही तुम्हारा हित है। जिस प्रकार उद्दण्ड घोड़े मार्गमें मूर्ख सारथिको मार डालते हैं, उसी प्रकार यदि इन्द्रियोंको वशमें न रखा जाय तो मनुष्यका सर्वनाश हो जाता है। इन्द्रियाँ जिसके वशमें हैं, उसके पास राज्यलक्ष्मी चिरकालतक सुरक्षित रहती हैं। भगवान् श्रीकृष्ण और अर्जुनको कोई नहीं जीत सकता। तुम श्रीकृष्णकी शरण लो। पाण्डवोंका न्यायोचित भाग तुम उन्हें दे दो और उनसे सन्धि कर लो। इसीमें दोनों पक्षोंका हित है। युद्ध करनेमें कल्याण नहीं है।' दुष्ट दुर्योधनने गान्धारीके इस उत्तम उपदेशपर ध्यान नहीं दिया, जिसके कारण महाभारतके युद्धमें कौरवपक्षका संहार हुआ। देवी गान्धारीने कुरुक्षेत्रकी भूमिमें जाकर वहाँ महाभारतके महायुद्धका विनाशकारी परिणाम देखा। उनके सौ पुत्रोंमेंसे एक भी पुत्र शेष नहीं बचा। पाण्डव तो किसी प्रकार भगवान् श्रीकृष्णकी कृपासे गान्धारीके क्रोधसे बच गये, किंतु भावीवश भगवान् श्रीकृष्णको उनके शापको शिरोधार्य करना पड़ा और यदुवंशका परस्पर कलहके कारण महाविनाश हुआ। महाराज युधिष्ठिरके राज्याभिषेकके बाद देवी गान्धारी कुछ समयतक पाण्डवोंके साथ रहीं और अन्तमें अपने पतिके साथ तपस्या करनेके लिये वनमें चली गयीं। उन्होंने अपने पतिके साथ अपने शरीरको दावाग्निमें भस्म कर डाला। गान्धारीने इस लोकमें पतिसेवा करके परलोकमें भी पतिका सान्निध्य प्राप्त किया। वे अपने नश्वर देहको छोड़कर अपने पतिके साथ ही कुबेरके लोकमें गयीं। पतिव्रता नारियोंके लिये गान्धारीका चरित्र अनुपम शिक्षाका विषय है। 🌿🍂☘️🌿🍂☘️🌿🍂☘️🌿🍂☘️🌿🍂☘️🌿 ❀༺꧁||🙏जय माँ🙏||꧂༻❀ #दुर्गा_मन्दिर_शक्ति_पीठ_वाटिका

Comments (8)

SHREE SHARMA
Sep 13, 2025
दीदी आप के नंबर भेज सकते है क्या

SHREE SHARMA
Sep 13, 2025
धन्यवाद दीदी

Saumya Sharma
Sep 13, 2025
जय श्री राम 🙏 जय बजरंगबली 🙏 जय शनिदेव 🙏 राम जी की कृपा से आपके जीवन में सुख, समृद्धि और खुशियां आती रहें 🙏🌹☺️ इसी शुभकामना के साथ शुभ रात्रि विश्राम भाई जी 🙏🌹☺️

Radhe Radhe
Sep 13, 2025
🌼▪️ पवित्रता गांधारी▪️🌼 ््््भाई जी बहुत अच्छी पोस्ट जी।।तहे दिल से आभार जी।। आपका हर एक पल शुभ हो।। पोस्ट लाइन स्टोरी अति सुंदर जी।।🌹🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌹

SHREE SHARMA
Sep 13, 2025
दीदी एक निवेदन है

SHREE SHARMA
Sep 13, 2025
धन्यवाद दीदी

Radhe Radhe
Sep 13, 2025
🌹🌹 गुड नाइट शुभ रात्रि सितंबर महीने के दूसरे शनिवार शुभ रात्रि की बहुत-बहुत शुभकामनाएं जी।। राधे कृष्णा राधे राधेजी।। भाई जी।।🌹🌹
