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पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत युद्ध में वीरगति प्राप्त करने के बाद जब दानवीर कर्ण परलोक पहुँचे, तो उन्हें खाने के लिए सोने-चाँदी, रत्न और आभूषण दिए गए। जब कर्ण ने देवराज इंद्र (कुछ कथाओं में यमराज) से इसका कारण पूछा कि उन्हें वास्तविक अन्न और जल क्यों नहीं मिल रहा, तो उन्हें बताया गया: * **अन्न दान का अभाव:** कर्ण ने जीवनभर सोना, चाँदी, भूमि और धन-दौलत का अपार दान किया, लेकिन अपने पूर्वजों (पितरों) को कभी जल तर्पण या अन्न दान नहीं दिया। पितृ ऋण और भूख मिटाने के लिए अन्न दान को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। * **अज्ञानता का कारण:** कर्ण ने स्पष्ट किया कि उन्हें अपने वास्तविक माता-पिता और कुल के बारे में जीवन के अंतिम समय तक ज्ञात नहीं था, इसलिए वे अपने पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध या अन्न दान नहीं कर सके। कर्ण की यह विवशता जानकर देवराज इंद्र ने उन्हें अपनी इस भूल को सुधारने का अवसर दिया। इंद्र ने कर्ण को **16 दिन (अश्विन मास के कृष्ण पक्ष)** के लिए पुनः पृथ्वी पर भेजा, ताकि वे: 1. अपने पूर्वजों का विधि-विधान से स्मरण और तर्पण कर सकें। 2. भूखों और जरूरतमंदों को भरपेट अन्न एवं जल दान कर सकें। कर्ण ने पृथ्वी पर रहकर इन 16 दिनों तक निष्ठापूर्वक अन्न दान और पितृ तर्पण किया। माना जाता है कि इसी घटना के बाद से हिंदू धर्म में **पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष)** की 16 दिनों की परंपरा विशेष रूप से स्थापित और प्रचलित हुई।

Comments (1)

Neeraj

Neeraj

Sep 27, 2026

जय जय श्री राधे जय श्री कृष्णा