
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
350 days ago
22 सितंबर से शरतकाल नवरात्र आरंभ हो रहे हैं। शरतकाल नवरात्रि के बारे में दुर्गा सप्तशती के 12वें अध्याय में स्वयं जगत जननी जी कहती हैं- शरत्काले महापूजा क्रियते या च वार्षिकी । तस्यां ममैतन्माहात्म्यं श्रुत्वा भक्तिसमन्वितः ॥ १२ ॥सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः । मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः ॥ १३ ॥ अर्थात यह दुर्गा सप्तशती के श्लोक में भगवती जी कहती हैं कि जो व्यक्ति शरद ऋतु में होने वाली वार्षिक महापूजा में, भक्तिपूर्वक मेरी महिमा का पाठ करता है, या करवाता है, सुनता है या सुनाता है, वह देवी के प्रसाद से सभी बाधाओं से मुक्त होकर धन, धान्य और संतान से परिपूर्ण हो जाता है। नवरात्रि में संपूर्ण दुर्गा सप्तशती का पाठ, मां की अखण्ड ज्योत, बाबा भैरव जी की अखण्ड ज्योत, कलश स्थापना, नित्य पूजन अलग-अलग पदार्थों के साथ और अष्टमी तिथि में संपूर्ण दुर्गा सप्तशती (700 श्लोक) के माध्यम से अष्टमी तिथि में हवन होगा। नवरात्रि पूजा एवं सप्तशती पाठ करने या करवाने से हमारे जीवन में कई सकारात्मक बदलाव होते है जैसे कि -: 👉 मां भगवती जी की हम पर और हमारे परिवार पर विशेष कृपा। 👉 क्रूर ग्रह जनित भयंकर पीड़ा का कम होना। 👉 शस्त्र से, अग्नि से, शत्रु से, भय का काम होना। 👉 श्री महाकाली, महालक्ष्मी महासरस्वती की कृपा होना। 👉 हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का वृद्धि होना। 👉 नकारात्मक ऊर्जा की तीव्रता का कम होना। 👉 धन-धान्य समृद्धि का वृद्धि होना। 👉 कार्य का समय पर होना। 👉 बीमारियों के प्रभाव का काम होना।
Comments (2)

Radhe Radhe
Sep 13, 2025
🌹🌹 जय माता दी मां दुर्गा माता जी की कृपा आप पर सदैव बनी रहे।। धन्यवाद ।।जी भाई जी।। वेरी नाइस पोस्ट जी।। ््््््ॐ 🙏🌹
