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हिंदू धर्म ग्रंथों, विशेषकर शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव के 19 प्रमुख अवतार माने गए हैं। भगवान शिव संहार के देवता होने के साथ-साथ कल्याणकारी भी हैं, और उन्होंने समय-समय पर धर्म की रक्षा और अपने भक्तों के कल्याण के लिए ये रूप धारण किए। यहाँ उन 19 अवतारों की सूची और उनका संक्षिप्त विवरण दिया गया है: भगवान शिव के 19 अवतार * पिप्पलाद अवतार: इस अवतार का जन्म ऋषि दधीचि के यहाँ हुआ था। शनि देव के कुप्रभाव से बचने के लिए पिप्पलाद अवतार की पूजा की जाती है। * नंदी अवतार: भगवान शिव ने नंदी के रूप में अवतार लेकर धर्म की रक्षा की। नंदी शिव जी के वाहन और सबसे प्रिय गण भी हैं। * वीरभद्र अवतार: जब माता सती ने यज्ञ की अग्नि में आत्मदाह किया था, तब शिव जी के क्रोध से इस भयंकर अवतार का जन्म हुआ था। * भैरव अवतार: इसे शिव का पूर्ण रूप माना जाता है। मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी को काल भैरव की उत्पत्ति हुई थी। * अश्वत्थामा: महाभारत काल में गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा को शिव का ही अंश माना जाता है। * शरभ अवतार: भगवान नृसिंह के क्रोध को शांत करने के लिए शिव जी ने शरभ (आधा पक्षी, आधा सिंह) का रूप लिया था। * गृहपति अवतार: नर्मदा तट पर बसे एक ब्राह्मण परिवार में शिव जी ने पुत्र के रूप में जन्म लिया था। * दुर्वासा अवतार: ऋषि अत्रि और अनुसूया के पुत्र के रूप में जन्मे दुर्वासा ऋषि अपने क्रोध के लिए जाने जाते हैं। * हनुमान अवतार: इन्हें शिव का 11वां रुद्रावतार माना जाता है। इन्होंने भगवान राम की सेवा के लिए यह रूप धरा था। * वृषभ अवतार: जब पाताल लोक में विष्णु पुत्रों ने उत्पात मचाया, तब शिव जी ने बैल (वृषभ) का रूप लेकर उन्हें शांत किया। * यतिनाथ अवतार: एक भील दंपत्ति की अतिथि सत्कार की परीक्षा लेने के लिए शिव जी ने यह रूप धारण किया था। * कृष्णदर्शन अवतार: यह अवतार यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठानों के महत्व को बताने के लिए हुआ था। * अवधूत अवतार: इंद्र का अहंकार चूर करने के लिए भगवान शिव ने अवधूत रूप धारण किया था। * भिक्षुवर्य अवतार: बेसहारा और अनाथों की रक्षा के लिए शिव जी ने यह भिक्षु रूप लिया था। * सुरेश्वर अवतार: एक बालक उपमन्यु की भक्ति की परीक्षा लेने के लिए शिव जी इंद्र का रूप धर कर आए थे। * किरात अवतार: अर्जुन की परीक्षा लेने और उन्हें पाशुपत अस्त्र देने के लिए शिव जी ने शिकारी (किरात) का रूप लिया था। * सुनट नर्तक अवतार: माता पार्वती के पिता हिमालय से उनका हाथ मांगने के लिए शिव जी नर्तक बनकर गए थे। * ब्रह्मचारी अवतार: सती के पुनर्जन्म के बाद पार्वती की परीक्षा लेने के लिए शिव जी ने ब्रह्मचारी का रूप धरा था। * यक्ष अवतार: देवताओं के अहंकार को नष्ट करने के लिए भगवान शिव ने यक्ष का रूप धारण किया था। > विशेष: इन अवतारों में 'हनुमान' और 'भैरव' रूप की पूजा वर्तमान में सबसे अधिक प्रचलित है। >

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