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Rama Devi Sahu

91 days ago

अधिक मास की पूर्णिमा अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। यह दिन भगवान विष्णु, माता महालक्ष्मी तथा पुरुषोत्तम भगवान की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस दिन श्रद्धा, जप, दान और लक्ष्मी उपासना करने से आर्थिक बाधाएँ दूर होने लगती हैं तथा धन-धान्य में वृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। अधिक मास पूर्णिमा के दिन प्रातः स्नान करके स्वच्छ पीले अथवा सफेद वस्त्र धारण करें। घर के पूजा स्थान में भगवान विष्णु और माता महालक्ष्मी का पूजन करें। माता लक्ष्मी के समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित करें तथा कमल गट्टे, पीले पुष्प और खीर का भोग अर्पित करें। धनप्राप्ति के लिए एक छोटी सी लाल या पीली थैली में 11 गोमती चक्र, 11 कौड़ियाँ तथा एक चाँदी का सिक्का रखकर माता महालक्ष्मी के चरणों में स्थापित करें। इसके बाद निम्न मंत्र की एक माला जप करें— ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद। ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥ जप पूर्ण होने के बाद उस थैली को अपनी तिजोरी, धन रखने के स्थान अथवा व्यापार स्थल पर स्थापित कर दें। मान्यता है कि इससे धन आगमन के नए मार्ग बनने लगते हैं तथा आर्थिक स्थिरता प्राप्त होती है। इस दिन महालक्ष्मी अष्टक का पाठ विशेष फलदायी माना गया है। यह स्तोत्र माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने का अत्यंत प्रभावशाली साधन माना जाता है। महालक्ष्मी अष्टकम् नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते। शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥ नमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयंकरि। सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥ सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयंकरि। सर्वदुःखहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥ सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि। मन्त्रमूर्ते सदा देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥ आद्यन्तरहिते देवि आद्यशक्ति महेश्वरि। योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥ स्थूलसूक्ष्ममहारौद्रे महाशक्ति महोदरे। महापापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥ पद्मासनस्थिते देवि परब्रह्मस्वरूपिणि। परमेशि जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥ श्वेताम्बरधरे देवि नानालङ्कारभूषिते। जगत्स्थिते जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥ फलश्रुति महालक्ष्म्यष्टकं स्तोत्रं यः पठेद्भक्तिमान्नरः। सर्वसिद्धिमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा॥ एककाले पठेन्नित्यं महापापविनाशनम्। द्विकालं यः पठेन्नित्यं धनधान्यसमन्वितः॥ त्रिकालं यः पठेन्नित्यं महाशत्रुविनाशनम्। महालक्ष्मीर्भवेन्नित्यं प्रसन्ना वरदा शुभा॥ अधिक मास पूर्णिमा के दिन श्रद्धापूर्वक महालक्ष्मी अष्टक का 11 बार पाठ करने तथा ऊपर दिए गए मंत्र का जप करने से माता महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, समृद्धि तथा वैभव का वास होने लगता है।

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Comments (8)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Jun 3, 2026

🙏‼️ Om Shree Lakshmi Narayan Namo Namah ‼️ Aap ka Ratri Sukhd or Mangalmay Ho 🌹 Shubh Ratri Jii 🌹🌹

Pannalal panchal

Pannalal panchal

Jun 3, 2026

ॐ नमो नारायण नारायण हरि हरि

Pannalal panchal

Pannalal panchal

Jun 3, 2026

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

R k jangid 

phulera Jaipur

R k jangid phulera Jaipur

May 31, 2026

जय श्री लक्ष्मी नारायण जी की शुभ प्रभात 🚩🌹🙏

Jyoti Agarwal

Jyoti Agarwal

May 31, 2026

राधे राधे 🙏

प्रेम कुमार

प्रेम कुमार

May 31, 2026

🌹 ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🌹 शुभ प्रभात वंदन 🌹

Pannalal panchal

Pannalal panchal

May 31, 2026

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय