
Rama Devi Sahu
71 days ago
*प्रवचन माला :-* ************** हमारे शरीर में जो चेतना शक्ति है वही हमारी आत्मा का मूल स्वरूप रूप है। हमारे चारों वेदों में उसी का वर्णन मिलता है । उपनिषद भी चारों वेदों से ही प्रकट हुए है उनमें जो नीचे दिए गए चार ब्रह्म वाक्य हैं , उनका सार भी यही है कि ईश्वर कहीं बाहर नहीं है बल्कि ना केवल हमारे भीतर है बल्कि इस संसार के कण कण में वही परमात्मा व्याप्त है। यहाँ उपनिषदों के सबसे महत्वपूर्ण मूल वाक्य और उनके अर्थ दिए गए हैं: १. प्रज्ञानं ब्रह्म (प्रज्ञान ही ब्रह्म है) * अर्थ: जो *परम चेतना* या ज्ञान है, वही 'ब्रह्म' (सर्वोच्च ईश्वर) है। * स्रोत: ऐतरेय उपनिषद (ऋग्वेद) २. अहम् ब्रह्मास्मि (मैं ब्रह्म हूँ) * अर्थ: मुझमें निवास करने वाली आत्मा और ब्रह्मांड का सर्वोच्च सत्य (ब्रह्म) एक ही हैं। मैं ही वह परम सत्य हूँ। * स्रोत: बृहदारण्यक उपनिषद (यजुर्वेद) ३. तत् त्वम् असि (तुम भी वही हो) * अर्थ: जो परम सत्य (ब्रह्म) संपूर्ण ब्रह्मांड का आधार है, वही तुम हो। व्यक्तिगत आत्मा और परमात्मा में कोई भेद नहीं है। * स्रोत: छान्दोग्य उपनिषद (सामवेद) ४. अयम् आत्मा ब्रह्म (यह आत्मा सर्वोच्च ब्रह्म है) * अर्थ: जो आत्मा हमारे भीतर अनुभव होती है, वही सर्वोच्च ब्रह्म है। * स्रोत: मांडूक्य उपनिषद (अथर्ववेद) 🙏🙏सबका मंगल हो 🙏🙏
Comments (6)

Rama Devi Sahu
Jun 20, 2026
🌹🌹जय श्री कृष्णा राधे राधे शुभ रात्रि वंदन जी 🌹🌹

Rama Devi Sahu
Jun 20, 2026
🌹🌹जय श्री कृष्णा राधे राधे शुभ रात्रि वंदन जी 🌹🌹

Rama Devi Sahu
Jun 20, 2026
जय श्री कृष्णा राधे राधे शुभ रात्रि वंदन जी 🌹🌹

प्रेम कुमार
Jun 20, 2026
🌹 जय श्री कृष्णा 🌹 शुभ रात्रि वंदन बहना 🌹

Jyoti Agarwal
Jun 20, 2026
राधे राधे 🙏

