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12.3.2026 संसार में मनुष्य के अतिरिक्त लाखों प्रकार के प्राणी हैं। इन सब प्राणियों को देखकर यदि गंभीरता से विचार किया जाए, तो यह स्पष्ट है कि *"यह सब ईश्वर की कर्म फल व्यवस्था है।"* *"जो व्यक्ति अच्छे काम करता है, उसको ईश्वर अच्छा फल देता है, अर्थात मनुष्य बनाता है। बुद्धिमान बनाता है। धार्मिक सदाचारी और धनवान माता-पिता के परिवार में जन्म देता है। स्वस्थ शरीर एवं सारी सुविधाएं देता है।"* *"और जो बुरे काम करता है, उसे पशु पक्षी कीड़ा मकोड़ा वृक्ष वनस्पति सांप बिच्छू शेर भेड़िया मछली आदि के शरीरों में जन्म देता है।" "मनुष्य योनि में सुख अधिक मिलता है, क्योंकि उसके पास बुद्धि विशेष, वाणी, हाथ और कर्म करने की स्वतंत्रता आदि विशेष सुविधाएं होती हैं। इन विशेष सुविधाओं की सहायता से व्यक्ति बहुत सा सुख प्राप्त कर लेता है।" "अन्य प्राणियों में बुद्धि आदि सुविधाएं बहुत कम होती हैं, जिससे कि वे अधिक सुख प्राप्त नहीं कर पाते। बस, जैसे तैसे अपना जीवन चला लेते हैं।"* सारी बात कहने का सार यह हुआ, कि *"हम और आप सबको अच्छे काम करने चाहिएं, जिससे कि हम और आप मनुष्य बनकर सुख प्राप्त कर सकें। और धीरे-धीरे उन्नति करते हुए मोक्ष तक भी पहुंचें। यदि अच्छे काम नहीं करेंगे, तो हमें और आपको पशु पक्षी योनियों में बहुत से दुख भोगने पड़ेंगे।"* अच्छे काम करने के लिए एक महत्वपूर्ण सिद्धांत यह है, कि *"व्यक्ति ईश्वर के दंड को सदा याद रखे। ईश्वर सब संसार का राजा है, निष्पक्ष एवं पूर्ण न्यायकारी है। वह सज्जनों को सदा सुख देता है। और दुष्टों एवं अपराधियों को भयंकर दंड देता है।"* दंड को सदा याद रखना इसलिए आवश्यक है, क्योंकि ईश्वर का बनाया हुआ यह संसार का नियम है, कि *"दंड के बिना कोई सुधरता नहीं है।"* *"यदि आप ईश्वर की न्याय व्यवस्था से दंड भोगना नहीं चाहते, तो ईश्वर को साक्षी मानकर पूर्ण न्यायकारी मानकर सदा अच्छे ही काम करें। तब तो आप दुखों से बचकर सुखी हो पाएंगे, अन्यथा नहीं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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