
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
4 hours ago
**चंद्रयान-1** भारत का चंद्रमा के लिए पहला अंतरिक्ष मिशन था, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा सफलताપूर्वक लॉन्च किया गया था. यह अंतरिक्ष में भारत की तकनीकी क्षमता और अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक छलांग (छाप) थी। इससे जुड़ी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं: * **प्रक्षेपण तिथि:** **22 अक्टूबर 2008** को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC) से इसे **PSLV-C11** रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया था। * **चाँद की कक्षा में प्रवेश:** लंबी यात्रा और कई चरणों की कक्षाओं को पार करते हुए **8 नवंबर 2008** को यह चंद्रमा की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित हो गया था। * **जवाहर पॉइंट:** 14 नवंबर 2008 को चंद्रयान-1 का 'मून इंपैक्ट प्रोब' (MIP) चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरा था। इस स्थान का नाम भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के नाम पर **'जवाहर पॉइंट'** रखा गया। इस पर भारत का तिरंगा झंडा भी चित्रित था। * **सबसे बड़ी खोज (पानी की मौजूदगी):** चंद्रयान-1 ने दुनिया को चौंकाते हुए सबसे पहले चंद्रमा की सतह पर **पानी (H2O) और हाइड्रॉक्सिल (OH) के अणुओं** की मौजूदगी के पुख्ता सबूत खोजे थे। * **पेलोड और अंतरराष्ट्रीय सहयोग:** इस मिशन में भारत के अपने उपकरणों के अलावा अमेरिका (NASA), यूरोप (ESA) और स्वीडन जैसे देशों के कुल 11 वैज्ञानिक उपकरण (पेलोड) भेजे गए थे। * **मिशन का समापन:** हालांकि इस मिशन की योजना दो साल की थी, लेकिन 29 अगस्त 2009 को अंतरिक्ष यान से संपर्क टूट गया, जिसके बाद इस अभियान को औपचारिक रूप से समाप्त घोषित कर दिया गया। तब तक इसने चंद्रमा के 3,400 से अधिक चक्कर लगा लिए थे। चंद्रयान-1 की सफलता ने ही भारत के लिए आगे के चंद्र अभियानों (जैसे चंद्रयान-2 और चंद्रयान-3) का रास्ता साफ किया और वैश्विक स्तर पर अंतरिक्ष महाशक्ति के रूप में भारत की मजबूत छाप छोड़ी।

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