
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
120 days ago
|| भगवान विष्णु का जन्म कैसे हुआ || ****************** हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु 'स्वयंभू' हैं, अर्थात उनका जन्म साधारण मनुष्य या माता-पिता के द्वारा नहीं हुआ बल्कि वे अनादि और अनंत है। पुराणों में इनकी उत्पत्ति को लेकर मुख्य रूप से दो कथाएं प्रचलित हैं:- 1-विष्णु पुराण के अनुसार (परमब्रह्म स्वरूप)विष्णु पुराण में भगवान विष्णु को निराकार और सर्वोच्च परब्रह्म माना गया हैं,उनके अनुसार प्रलय के बाद भी विष्णु जी का अस्तित्व रहता है और वे ही सृष्टि के निर्माता (ब्रह्मा) और संहारक (शिव) के मूल कारण हैं। 2- शिव पुराण के अनुसार शिव पुराण में उत्पत्ति का एक अलग प्रसंग है।इसके अनुसार जब भगवान शिव माता आदिशक्ति के साथ सृष्टि के संचालन के लिए विचार कर रहे थे, तब उन्होंने अपनी इच्छा से अपने वाम (बाएँ) अंग पर अमृत का स्पर्श किया। इससे भगवान विष्णु का प्रादुर्भाव (उत्पत्ति) हुआ। विष्णु पुराण में विष्णु का जन्म ************** विष्णु पुराण के अनुसार विष्णु का जन्म नहीं हुआ बल्कि वे एकमात्र निरंतर शक्ति है जो अनंत काल से अस्तित्व में है। ऐसा माना जाता है कि विष्णु प्रलय के बाद भी मौजूद थे और उन्होंने ब्रह्मांड, ब्रह्मा और शिव को पुनः अस्तित्व प्रदान किया। चूंकि विष्णु ब्रह्मांड के संरक्षक हैं इसलिए ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने शेष सभी सृष्टि की सुविधा के लिए ब्रह्मा की रचना की, और फिर शिव को अराजकता के विनाशक के रूप में बनाया। माना जाता है कि इस प्रक्रिया में उनके साथ माता लक्ष्मी भी होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसरा विष्णु ने ब्रह्मा को अपने पेट से और शिव को उनके माथे से बनाया था। इसी क्रम में विष्णु ने लक्ष्मी को अपने बाएं हाथ से बनाया था। चूंकि वैष्णववाद संप्रदाय भगवान विष्णु के आसपास केंद्रित है, और चूंकि विष्णु ही इस विश्वास प्रणाली में एकमात्र शाश्वत ईश्वर है, इसलिए विष्णु की यह मूल कहानी शेष त्रिमूर्ति और लक्ष्मी के निर्माण की कहानी से अधिक विस्तृत मानी गई है। भगवान विष्णु का स्वरूप- ************* भगवान विष्णु का रंग या आभा नीलवर्ण या नीली है। भगवान विष्णु की यह अद्भुत आभा आकाश के रंग, उसके आलौकिक आयामों, बिजली, बारिश और प्रकृति के साथ उनके संबंधों को दर्शाता है। भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र में उन्हे एक चेहरे और चार भुजाओं के साथ दर्शाया जाता रहा है। भगवान विष्णु की दो मुद्राएं प्रमुख रूप से देखने को मिलती है एक खड़ी और दूसरी आराम करने वाली। वह प्रसिद्ध कौस्तुभ रत्न से बना एक हार पहनते हैं जो उसकी बाईं छाती पर टिका होता है उनके गले में वैजयंती नाम से फूलों और रत्नों की अन्यत्र मालाएं होती है। उनकी चार भुजाओं में क्रमशः शंख, चक्र, गदा और कमल हैं। || विष्णु भगवान की जय हो ||

Comments (1)

Riya Riya 💖💖
Jun 12, 2026
जय श्री हरि बिष्णु भगवान 🌿🌿🌹🌹
