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19.5.2026 यह सब का अनुभव है कि *"इच्छाओं को पूरा करने से इच्छाएं बढ़ती हैं, और सारी इच्छाएं कभी किसी की आज तक न पूरी हुई, न हो रही हैं, और न भविष्य में होंगी। इसलिए सुखी होने के लिए आपको कुछ इच्छाएं तो छोड़नी ही होंगी।"* इच्छाओं की व्यवस्था इस प्रकार से है। *"आपकी जो इच्छाएं पूरी हो चुकी हैं। उसके लिए ईश्वर का धन्यवाद करें, क्योंकि ईश्वर की कृपा और सहायता के बिना किसी की इच्छाएं पूरी नहीं हो सकती।"* *"जो इच्छाएं बची हुई हैं, उनमें से जो पूरी हो सकती हैं, उनको पूरा करने के लिए पुरुषार्थ करें। वे भी पूरी हो जाएंगी।"* *"परंतु जो इच्छाएं पूरी हो ही नहीं सकती, जो आपके सामर्थ्य से बाहर हैं, उन इच्छाओं को तो अवश्य ही छोड़ दें अन्यथा वे आपको सदा दुख ही देती रहेंगी।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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