
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
66 days ago
21.8.2026 *"ईश्वर एक है, सर्वव्यापक है, निराकार है, सर्वशक्तिमान है, न्यायकारी है, आनंदस्वरूप है।"* वास्तव में वेदों के अनुसार ईश्वर ऐसा है। *"परंतु लोग क्या मानते हैं? ईश्वर अनेक हैं। ईश्वर हमारे घर में रहता है, हमारे मंदिर में रहता है। समय-समय पर वह अवतार लेता है। और अब अवतारों की फोटो मूर्तियां बनाकर लोग उनकी पूजा कर रहे हैं। जो ईश्वर सारी सृष्टि को बनाता है, उसी को लोग मूर्ति के रूप में बना रहे हैं। जो ईश्वर न्याय करता है, उसी से लोग जाकर माफी मांग रहे हैं। नदियों में स्नान करने से पाप धुल जाता है, ऐसा मानकर ईश्वर को अन्यायकारी कह रहे हैं। स्वीकार कर रहे हैं, और उसका इस रूप में प्रचार कर रहे हैं।"* *"जबकि ईश्वर आनंदस्वरूप है। फिर भी लोग ईश्वर का आनंद बिल्कुल नहीं लेना चाहते। संसार के जड़ पदार्थों खीर पूरी हलवा मिठाई सोना चांदी मोटर गाड़ी आदि का ही आनंद ले रहे हैं।"* यह सब क्या है? यह सब असत्य है। क्योंकि *"वेदों के अनुसार ऊपर लिखी बातें सत्य हैं। जैसे ईश्वर एक है, सर्वव्यापक है, निराकार है, सर्वशक्तिमान है, न्यायकारी है, आनंदस्वरूप है।" "जब वास्तव में ईश्वर ऐसा है, तो उसी के अनुसार अपना जानना मानना बोलना लिखना और व्यवहार क्यों नहीं करते?"* *"ऐसे असत्य से बचें, और वेदों के अनुसार जैसा वास्तव में ईश्वर है, वैसा स्वीकार करें। वैसा ही लिखें बोलें, मानें, और व्यवहार भी करें। तभी आपका कल्याण होगा, अन्यथा नहीं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक निदेशक दर्शन योग महाविद्यालय रोजड़ गुजरात।"*

Comments (1)

Savita om namah shivay 🙏🌹
Aug 21, 2026
RADHE RADHE 🙏🌹
