
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
330 days ago
*┈┉सनातन धर्म की जय,हिंदू ही सनातनी है┉┈* *लेख क्र.-सधस/२०८२/आश्विन/शु./१२.-१९३४०* *┈┉══════❀((""ॐ""))❀══════┉┈* 💎 *जीवन को सफल बनाने एवं एक सही दिशा देने के लिए उचित मार्गदर्शन हेतु .…*💎 💎 *भारतीय साहित्य की अनमोल धरोहर_चाणक्य नीति*⏩ *गतांक से आगे....* 🔘 *कान्तावियोगः स्वजनापमानः ऋणस्य शेषः कुनृपस्य सेवा। दरिद्रभावो विषमा सभा च विनाग्निनैते प्रदहन्ति कायम् ।।* पत्नी का बिछुड़ना, अपने बंधु-बांधवों से अपमानित होना, कर्ज चढ़े रहना, दुष्ट अथवा बुरे मालिक की सेवा में रहना, निर्धन बने रहना, दुष्ट लोगों और स्वार्थियों की सभा अथवा समाज में रहना, ये सब ऐसी बातें हैं, जो बिना अग्नि के शरीर को हर समय जलाती रहती हैं। ।।14।। सज्जन लोग अपनी पत्नी के वियोग को सहन नहीं कर सकते। यदि उनके अपने भाई-बन्धु उनका अपमान अथवा निरादर करते हैं तो वह उसे भी नहीं भुला सकते। जो व्यक्ति कर्जे से दबा है, उसे हर समय कर्ज न उतार पाने का दुख रहता है। दुष्ट राजा अथवा मालिक की सेवा में रहने वाला नौकर भी हर समय दुखी रहता है। निर्धनता तो ऐसा अभिशाप है, जिसे मनुष्य सोते और उठते-बैठते कभी नहीं भुला पाता। उसे अपने स्वजनों और समाज में बार-बार अपमानित होना पड़ता है। अपमान का कष्ट मृत्यु के समान है। ये सब बातें ऐसी हैं, जिनसे बिना आग के ही व्यक्ति अंदर-ही-अंदर जलता रहता है। जीते-जी चिता का अनुभव करने की स्थिति है यह। *क्रमश:____* ▬▬▬▬▬▬๑⁂❋⁂๑▬▬▬▬▬▬ *जनजागृति हेतु लेख प्रसारण अवश्य करें* अयं निजः परो वेति गणना लघु चेतसाम्। उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ॥ *भगवान शनिदेव जी की जय* *⛳⚜सनातन धर्मरक्षक समिति⚜⛳*
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