MyMandirInstall

कोल्हापुर की प्रसिद्ध श्री करवीर निवासिनी महालक्ष्मी (अंबाबाई) के मुकुट पर पाँच फन वाला नाग (सर्प) होने के पीछे धार्मिक, पौराणिक और तांत्रिक कारण जुड़े हुए हैं: * **आदिशक्ती का स्वरूप और दुर्गा सप्तशती:** प्राचीन धार्मिक ग्रंथों (विशेषकर मार्कंडेय पुराण के अंतर्गत 'दुर्गा सप्तशती' और 'श्री सूक्त' / 'स्कंद पुराण') में देवी महालक्ष्मी के मूल और शाश्वत स्वरूप का वर्णन मिलता है। इस वर्णन के अनुसार, देवी के मस्तक पर योनि, लिंग और साडेतीन फेरे लिए हुए नाग या उनके मुकुट पर पाँच फन वाला नाग विराजमान रहता है। यह उनके 'त्रिगुणात्मक' और संपूर्ण ब्रह्मांड की आद्य शक्ति (प्रकृति) होने का प्रतीक है। * **कुंडलिनी शक्ति और ब्रह्मांडीय ऊर्जा:** योग और अध्यात्म में पाँच फन वाले नाग को मानव शरीर में स्थित **कुंडलिनी शक्ति**, चेतना और अपार ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। चूंकि महालक्ष्मी संपूर्ण सृष्टि की संचालिका और आदिशक्ती हैं, इसलिए उनके मुकुट पर नाग इस बात का द्योतक है कि समस्त चेतना और ऊर्जा उन्हीं से नियंत्रित होती है। * **संरक्षण और सृजन का प्रतीक:** सनातन संस्कृति में नाग को भगवान विष्णु (जो कि जगत के पालनहार हैं और महालक्ष्मी के स्वामी माने जाते हैं) के साथ भी जोड़ा जाता है। शेषनाग पर विश्राम करने वाले विष्णु जी की शक्ति होने के नाते देवी के मुकुट पर नाग उनका संरक्षण, दिव्यता और राजसी वैभव दर्शाता है। संक्षेप में कहें तो, यह पाँच फन वाला नाग देवी महालक्ष्मी के **सर्वशक्तिमान, आदिशक्ती और तांत्रिक-पौराणिक स्वरूप** को प्रकट करता है, जिसका उल्लेख उनके प्राचीन शास्त्रों और स्तोत्रों में भी मिलता है।

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!