
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
206 days ago
6.2.2026 लोग एक दूसरे को सुझाव देते रहते हैं। परंतु प्रायः इस बात को वे भूल जाते हैं कि *"जो सुझाव मैं दूसरे व्यक्ति को दे रहा हूं, यह मेरे लिए भी उतना ही उपयोगी है, जितना दूसरे व्यक्ति के लिए।"* फिर होता क्या है, कि *"व्यक्ति दूसरे को सुझाव देकर अपना कर्तव्य पूरा हो गया," ऐसा मान लेता है. "और स्वयं उस सुझाव पर कोई आचरण नहीं करता। इसलिए उसकी अपनी उन्नति नहीं हो पाती।"* *"दूसरों को सुझाव देना सरल है। परंतु उस पर स्वयं आचरण करना बहुत कठिन है।" "जो सुझाव आप प्रायः दूसरों को देते रहते हैं, यदि आप स्वयं भी उन सुझावों पर आचरण करना आरंभ कर दें, और पूरी शक्ति लगा दें, तो आपको महापुरुष बनने से कोई नहीं रोक सकता।"* आश्चर्य की बात तो यह है, कि *"लोग सुझाव दे देकर दूसरों को तो महापुरुष बनाना चाहते हैं, परन्तु वे स्वयं पुरुषार्थ करके महापुरुष बनना नहीं चाहते!"* *"हे ईश्वर! सबको सद्बुद्धि दीजिए, कि सब लोग पुरुषार्थी बनें और स्वयं महापुरुष बनकर अपना जीवन सफल बनाएं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

Comments (2)

Rama Devi Sahu
Feb 6, 2026
Bahut hi Sundar Sujhavo... Sahi Baat hai ✅ 🙏
