MyMandirInstall

*जीवन दर्शन - स्वाध्याय* स्वाध्याय के कई अर्थ हैं जैसे - स्वयं अध्ययन करना, स्वयं को पढ़ना, ज्ञानवर्धन, मन व चिंतन द्वारा नियंत्रण आदि. समावर्तन अर्थात् शिक्षा या ब्रह्मचर्य की समाप्ति पर आचार्य मुख्यतः स्वाध्याय का ही उपदेश देते हैं. वेद, पुराण, उपनिषद, ब्राह्मण ग्रन्थ, स्मृति आदि में भी स्वाध्याय का अत्यधिक महत्व बताया गया है. आश्रम व्यवस्था के अंतर्गत वानप्रस्थ आश्रम का प्रधान कर्तव्य स्वाध्याय में ही निहित है. *मेरी संस्कृति…मेरा देश…मेरा अभिमान 🚩*

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!