
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
285 days ago
सुप्रभात भीतर क्षमा हो तो क्षमा निकलेगी भीतर क्रोध हो तो क्रोध निकलेगा इसलिए जब भी कुछ आपके भीतर से बाहर निकले तो दूसरे को दोषी मत ठहराना वह आपकी ही संपदा है जिसको आप अपने भीतर छिपाए थे .. अपने अंदर के बच्चे को हंमेशा ज़िंदा रखिये हद से ज्यादा समझदारी जीवन को नीरस कर देती है.... _संयम क्या है......एक युद्ध.....अपने ही विरूद्ध.... बटुए को कहाँ मालूम पैसे उधार के हैं वो तो बस फूला ही रहता है अपने गुमान में ठीक यह ही हाल हमारा है साँसे उस प्रभु की उधार दी हुई है पर ना जाने गुमान किस बात पर है.... 🌷🌞॥जय श्रीराम॥🌞🌷
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