MyMandirInstall

*भगवान परशुराम और कावड़ यात्रा की परंपरा* भगवान परशुराम ने परशुरामेश्वर महादेव शिवलिंग की स्थापना की और कावड़ अर्पण करने की परंपरा शुरू की। त्रेतायुग में धर्म की पुनर्स्थापना के लिए भगवान विष्णु के अंशावतार परशुराम का अवतार हुआ, जिनके तप, तेज, शौर्य और धार्मिक निष्ठा से पूरा विश्व प्रकाशित हो गया। *कावड़ यात्रा की शुरुआत* भगवान परशुराम ने हरिद्वार से गंगा जल लाकर शिवलिंग पर अभिषेक करने की प्रतिज्ञा की। उन्होंने गंगा माता से एक पाषाण की मांग की, जिसे गंगा ने उन्हें दिया। परशुराम ने उस पाषाण से शिवलिंग बनाया और उसकी प्राणप्रतिष्ठा की। *शिवजी का आशीर्वाद* शिवजी ने भगवान परशुराम को आशीर्वाद दिया और कहा कि यह स्थल 'परशुरामेश्वर महादेव' के नाम से प्रसिद्ध होगा और यहां आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होंगी। शिवजी ने यह भी कहा कि वे हर साल इस स्थल पर आएंगे और भक्तों को दर्शन देंगे। *कावड़ यात्रा का महत्व* कावड़ यात्रा की परंपरा भगवान परशुराम ने शुरू की, जिसमें भक्त गंगा जल लाकर शिवलिंग पर अर्पण करते हैं। यह परंपरा भक्तों को एकत्र करती है और उन्हें 'ॐ नमः शिवाय' महामंत्र का उच्चारण करने का अवसर प्रदान करती ह

Post media

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!