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🥀रोग और दुःख के कारण🥀 जो पाप छिपकर किये जाते हैं, वे ही रोग बनकर शरीर में छिप जाते हैं और समय आने पर अपना तांडव शुरू कर दिया करते हैं। जो पति अथवा पत्नी, एक दूसरे के साथ विश्वासघात करते हैं, उनके उद्धार का उपाय बताते समय तो एक बार ब्रह्माजी भी चुप हो गये। ऐसे ही तीर्थ-स्थलों पर किये गए पाप वज्रलेप हो जाते हैं अर्थात उनका शमन भी आसान नहीं होता। ऐसा भी पुराणों में वर्णित है कि गंगातट पर किया गया पाप समुद्र-स्नान से नष्ट हो जाता है, किन्तु समुद्रतट पर किया गया पाप नष्ट नहीं होता। इसी प्रकार जानबूझकर और अनजाने में किये गए पापों का शमन भी आसान नहीं होता। यदि पापी प्रायश्चित करना चाहता है तो वह जो यह प्रतिज्ञा कर लेता है कि उसे कभी भी कोई पाप नहीं करना है तो उसके उद्धार के लिए कुछ सुगम व जटिल उपाय भी बताए गए हैं। ऐसा भी वर्णन है कि 'नर्मदा नर्मदा नर्मदा' कहते ही पूर्व संचित पाप नष्ट हो जाते हैं, बशर्ते पुनः पाप न करने की प्रतिज्ञा कर ली जाये। प्रायश्चित करने के उपरान्त भी यदि कोई पाप करता है तो उसका उद्धार कभी नहीं होता। इसलिये अपने क्षणिक सुख के लिए कभी भी किसी के साथ विश्वासघात नहीं करना चाहिए। विश्वासघात का प्रायश्चित ही मुश्किल होता है। ऐसे भी पापी हुए हैं, जिन्होंने अपने पुरुषार्थ से ब्रह्मज्ञान प्राप्त करके अपने समस्त पापों को समूल नष्ट भी किया है-- ऐसे भी सप्तर्षियों के वचन हैं। ध्यान रहे कि हम न तो उपदेशक हैं और न ज्ञानी ही। हमने तो वही लिखा है, जो हमारे संज्ञान में है। _श्री शिवशक्ति सदा सहायते🚩🚩_

Comments (3)

Lal  Singh 🇮🇳🇮🇳

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳

Sep 16, 2025

शुभ रात्री भाई जी 🙏 आप का हर पाल शुभ रहे जी 🙏

Radhe Radhe

Radhe Radhe

Sep 16, 2025

🍀🍀 शुभ रात्रि मंगलवार की शुभकामनाओं, के साथ आपका हर पल शुभ हो। जय श्री राम जी भाई जी ‌‌।।🍀🍀

Radhe Radhe

Radhe Radhe

Sep 16, 2025

🙏🙏🙏🙏🙏