
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
184 days ago
ओड़िशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी यह मान्यता वाकई बहुत ही विस्मयकारी और भावुक करने वाली है। हिंदू धर्मग्रंथों और लोक कथाओं के अनुसार, इस घटना का संबंध भगवान कृष्ण के देह त्याग से जुड़ा है। यहाँ इस रहस्य से जुड़ी मुख्य बातें दी गई हैं: भगवान का 'अधूरा' शरीर और नील माधव पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान कृष्ण ने अपनी लीला समाप्त की, तब उनके पार्थिव शरीर का दाह संस्कार किया गया। लेकिन उनका 'हृदय' (Heart) अग्नि में नहीं जला और जीवित अवस्था में ही रहा। इसे 'ब्रह्म पदार्थ' कहा जाता है। आज भी क्या धड़कता है हृदय? मान्यता है कि वही 'ब्रह्म पदार्थ' आज भी भगवान जगन्नाथ की काष्ठ (लकड़ी) की मूर्ति के भीतर सुरक्षित है। * नव कलेवर उत्सव: हर 12 से 19 साल में जब भगवान की मूर्तियाँ बदली जाती हैं, तब पूरे शहर की बिजली काट दी जाती है और पुजारी की आँखों पर पट्टी बाँध दी जाती है। * अनुभव: पुरानी मूर्ति से निकालकर इस 'ब्रह्म पदार्थ' को नई मूर्ति में स्थापित किया जाता है। जिन पुजारियों ने इसे छुआ है, उनका कहना है कि यह कोई जीवित चीज़ जैसा महसूस होता है जो धड़कता है। खून बहने की मान्यता का रहस्य जहाँ तक भगवान के पैरों से खून बहने की बात है, यह मुख्य रूप से 'नीलाद्रि बिजे' या मंदिर की परंपराओं से जुड़ी कहानियों में आता है। एक प्रसिद्ध मान्यता यह भी है: * जब मूर्तिकार (स्वयं भगवान विश्वकर्मा) मूर्ति बना रहे थे, तो रानी के कहने पर राजा ने दरवाजा खोल दिया था। * शर्त टूटने के कारण मूर्तियाँ अधूरी रह गईं (बिना हाथ और पैर के)। * भक्तों का मानना है कि भगवान आज भी अपने उसी 'नील माधव' स्वरूप के दर्द और प्रेम को संजोए हुए हैं। > नोट: मंदिर के मुख्य विग्रह के भीतर स्थित 'ब्रह्म पदार्थ' को आज तक किसी ने खुली आँखों से नहीं देखा है। यह केवल एक गहरा आध्यात्मिक अनुभव और अटूट विश्वास है। > जय जगन्नाथ
Comments (3)

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
Feb 27, 2026
जय जगन्नाथ जी 🙏 येतो मुझे भी पत्ता नही है जी ये विडिओ हाथ लग जाते है भेज देता हु क्या मालूम सही है या गलत माफ करना जी 🙏

Rama Devi Sahu
Feb 27, 2026
Jai Jagannath 🙏 Mahaprabhu Shri Jagannath Ji ki Yah Rahsya mujhe bhi Pata nhi tha...! Aap ye Vichar or Upasthapana Saili Khoob Sundor or Hriday ko Baar Baar Romanchit krta hai...!! Prabhu Shri Jagannath Ji ki Aasirbad se Aap Hamesha Eeise eeise Jankariyan Bhejte Raho 🙏 Bahut Bahut Dhanyawad Jii 🙏 Aap ka Mangal Ho 🙏🌹🌹

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
Feb 27, 2026
भारत में कई ऐसे प्राचीन और चमत्कारिक मंदिर हैं, जिनसे जुड़ी लोककथाएं और मान्यताएं लोगों को हैरान कर देती हैं। जब आप भगवान के पैरों से रक्त (खून) निकलने की बात करते हैं, तो सबसे प्रमुख संदर्भ झारखंड के देवघर स्थित बैद्यनाथ धाम और उससे जुड़ी कथाओं से मिलता है। यहाँ इस रहस्य से जुड़ी मुख्य जानकारी दी गई है: बैद्यनाथ धाम (देवघर) की पौराणिक कथा प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, जब लंकापति रावण भगवान शिव को प्रसन्न कर शिवलिंग को लंका ले जा रहा था, तब भगवान विष्णु ने 'बैजू' नामक चरवाहे का रूप धरकर छल से शिवलिंग को जमीन पर रखवा दिया था। * मान्यता: कहा जाता है कि जब रावण को अपनी भूल का एहसास हुआ, तो उसने क्रोध और ग्लानि में शिवलिंग पर अंगूठा दबाया था या प्रहार किया था। * दावा: स्थानीय लोग और कई श्रद्धालु यह मानते हैं कि यहाँ स्थित शिवलिंग पर एक ऐसा निशान है जिससे समय-समय पर तरल पदार्थ निकलता है, जिसे भक्त श्रद्धावश रक्त या दिव्य द्रव मानते हैं। अन्य मिलते-जुलते चमत्कारिक स्थान भारत में कुछ और भी मंदिर हैं जहाँ मूर्तियों से रक्त निकलने की कहानियाँ प्रसिद्ध हैं: * कामाख्या देवी मंदिर (असम): यहाँ किसी मूर्ति के पैर से नहीं, बल्कि गर्भगृह की शिला से प्राकृतिक रूप से लाल द्रव्य प्रवाहित होता है। इसे माता का मासिक धर्म माना जाता है। * केरल का चेंगन्नूर महादेव मंदिर: यहाँ भी माँ पार्वती की मूर्ति से रक्त के निशान मिलने की बात कही जाती है, जिसे 'थ्रिपुट्टू' उत्सव के रूप में मनाया जाता है। * चिदंबरम मंदिर (तमिलनाडु): यहाँ कुछ विशेष तिथियों पर 'नटराज' की मूर्ति के पास होने वाले चमत्कारों की चर्चा होती है, हालांकि यह मुख्य रूप से धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। > एक विचार: विज्ञान की दृष्टि से कई बार चट्टानों में मौजूद खनिजों (जैसे आयरन ऑक्साइड) और नमी के मिलने से लाल रंग का तरल पदार्थ निकलता है, जिसे लोग अपनी अटूट श्रद्धा के कारण भगवान का चमत्कार मानते हैं। >
