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0️⃣1️⃣❗0️⃣9️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣6️⃣ *🌼🎋🟧 भक्त का कर्जदार 🟧🎋🌼* क्या आप जानते हैं कि एक ऐसा भी भक्त था, जिसके सामने आने से खुद भगवान बाँके बिहारी भी कतराने लगे थे? आखिर ऐसा क्या हुआ कि ब्रह्मांड के स्वामी को एक साधारण भक्त का 'कर्ज़दार' बनना पड़ा? आइए जानते हैं निष्काम भक्ति का यह हैरान कर देने वाला प्रसंग! एक गाँव में एक निष्काम भक्त रहते थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन श्री राधा-कृष्ण का नाम जपते हुए गुज़ार दिया था। न कोई इच्छा न कोई सांसारिक तृष्णा। मंदिर जाते तो केवल दर्शन करने कभी भगवान के आगे हाथ फैलाकर कुछ माँगा नहीं। उनके लिए नाम जप ही उनका जीवन था। एक दिन वे अत्यंत भावुक मन से श्री धाम वृंदावन के बाँके बिहारी मंदिर पहुँचे। उन्होंने जैसे ही गर्भगृह की ओर आँखें उठाईं उनके पाँव ठिठक गए। वहाँ सिंहासन तो था लेकिन बाँके बिहारी जी गायब थे! भक्त की आँखें फटी की फटी रह गईं। वे बदहवास होकर आसपास खड़े श्रद्धालुओं से पूछने लगे "भाइयों! आज हमारे बिहारी जी कहाँ चले गए? मुझे सिंहासन खाली क्यों दिख रहा है?" लोग उन्हें अचरज से देखने लगे। किसी ने कहा "क्या बात करते हो बाबा! सामने ही तो मदन मोहन खड़े हैं। मंद मंद मुस्कुरा रहे हैं। तुम्हें नहीं दिख रहे क्या? आँखें खराब हो गई हैं या दिमाग? भक्त के सीधे सादे अंतःकरण में यह बात तीर की तरह चुभ गई। वे सोचने लगे 'सबको प्रभु के दर्शन हो रहे हैं, केवल मुझे ही नहीं दिख रहे! इसका मतलब मेरे सिर पर पापों का इतना बड़ा पहाड़ चढ़ गया है कि मैं प्रभु के दर्शन के योग्य ही नहीं बचा।' ग्लानि और पश्चाताप से उनका हृदय भर आया। उन्होंने मन ही मन कठोर निर्णय लिया जिस शरीर से मेरे आराध्य का दर्शन न हो सके ऐसे पापी शरीर को रखने का कोई अर्थ नहीं है। मैं आज ही यमुना जी की पवित्र धाराओं में अपने प्राण त्याग दूँगा। वे रोते बिलखते यमुना जी के घाट की ओर दौड़ पड़े। इधर सर्वव्यापी और अंतर्यामी बाँके बिहारी जी से अपने भक्त का यह दुख देखा न गया। वे तुरंत एक ज्ञानी ब्राह्मण का रूप धरकर एक अत्यंत असहाय कोढ़ी के पास पहुँचे। ब्राह्मण रूपी भगवान ने कोढ़ी से कहा "हे भाई! देखो वो जो भक्त यमुना जी की तरफ भागे जा रहे हैं, वे कोई साधारण मनुष्य नहीं हैं। उनके तप और जप में बहुत शक्ति है। यदि वे तुम्हें दिल से आशीर्वाद दे दें तो तुम्हारा यह पुराना कोढ़ तुरंत समाप्त हो जाएगा। यह सुनते ही कोढ़ी अपनी पूरी ताकत लगाकर यमुना तट की ओर भागा और भक्त के पैरों में गिर पड़ा। उसने उनके चरण कसकर पकड़ लिए और गिड़गिड़ाने लगा महाराज! मुझ पर कृपा कर दीजिए मुझे आशीर्वाद दे दीजिए!" भक्त ने अत्यंत विनम्रता से कहा "अरे भाई! मुझे छोड़ो। मैं तो स्वयं एक पापी हूँ जिसकी आँखों से भगवान भी ओझल हो गए। मेरे आशीर्वाद में क्या बल होगा? परंतु कोढ़ी टस से मस न हुआ। वह रोते हुए प्रार्थना करता रहा अंततः भक्त का कोमल हृदय पिघल गया। उन्होंने अनमने मन से कोढ़ी के सिर पर हाथ रखा और कहा "जाओ भाई भगवान तुम्हारी इच्छा पूरी करें! और यह क्या! शब्द मुख से निकलते ही कोढ़ी का सारा रूप बदल गया। उसका कुष्ठ रोग पलक झपकते ही गायब हो गया और उसकी काया कंचन जैसी निर्मल हो गई! भक्त स्तब्ध खड़े देखते ही रह गए कि यह कैसा चमत्कार है? तभी सामने एक दिव्य प्रकाश पुंज प्रकट हुआ। उस ज्योतिर्मय प्रकाश से स्वयं साक्षात बाँके बिहारी जी मंद मंद मुस्कुराते हुए प्रकट हो गए! अपने आराध्य को सामने देख भक्त अपने आँसू न रोक सके। वे प्रभु के चरणों में गिर पड़े। भगवान ने अपने हाथों से उठाकर उन्हें गले से लगा लिया। भक्त ने रुंधे गले से पूछा "प्रभु! यह कैसी लीला है? मंदिर में आपने मुझे दर्शन क्यों नहीं दिए? और अब बिना किसी साधन के, अनायास ही मुझे यह दिव्य दर्शन दे दिए? भगवान बाँके बिहारी ने अत्यंत वात्सल्य भाव से कहा, "हे भक्तराज! आपने जीवन भर मेरा नाम जपा, लेकिन बदले में कभी कुछ नहीं माँगा। आपकी निष्काम भक्ति का मुझ पर इतना भारी ॠण चढ़ गया था कि मैं आपका ऋणी हो गया था। उस कर्ज के बोझ के कारण ही मुझे आपके सामने आने में संकोच हो रहा था। लेकिन आज जब आपने उस कोढ़ी को आशीर्वाद दिया तो आपने अपने जीवन भर के पुण्यों में से थोड़ा सा पुण्य फल माँग लिया। इससे मेरा कुछ कर्ज कम हुआ और मुझमें आपके सामने आने की हिम्मत आई! यह सुनकर भक्त प्रभु की इस अपार करुणा और प्रेम को देखकर भाव विभोर हो गए..!! *🙏🏾🙏🏽🙏🏻बांके बिहारी लाल की जय*🙏🏼🙏🙏🏿

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Comments (2)

Lal  Singh 🇮🇳🇮🇳

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳

Sep 1, 2026

जय श्री कृष्णा जी 🙏

Ramesh Sahu

Ramesh Sahu

Sep 1, 2026

Jai shree Krishna Jai Sri Ram