
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
70 days ago
हिन्दू तंत्र और श्रीविद्या परंपरा में **'तिथि नित्या देवियाँ'** (Tithi Nitya Devis) का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। ये देवी ललिता महात्रिपुरसुंदरी की सोलह अभिव्यक्तियाँ मानी जाती हैं, जिन्हें **'षोडश नित्या'** (Shodasa Nityas) भी कहा जाता है। ### तिथि नित्या देवियों का अर्थ 'नित्या' का अर्थ है 'शाश्वत' या 'जो सदा रहने वाली हैं'। ये पंद्रह देवियाँ चंद्रमा की पंद्रह कलाओं (तिथियों) का प्रतिनिधित्व करती हैं। पूर्णिमा से अमावस्या तक चंद्रमा की जो कलाएँ घटती और बढ़ती हैं, उन सभी का संचालन इन्हीं देवियों द्वारा होता है। * **१५ तिथियाँ:** शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (पहली तिथि) से पूर्णिमा तक, प्रत्येक तिथि एक देवी द्वारा शासित होती है। * **सोलहवीं नित्या:** सोलहवीं नित्या स्वयं 'ललिता महात्रिपुरसुंदरी' हैं, जो अदृश्य हैं और पूर्णता का प्रतीक हैं। ### १५ तिथि नित्या देवियों की सूची ये देवियाँ कालचक्र का प्रतिनिधित्व करती हैं: | क्रम | देवी का नाम | |---|---| | १ | कामेश्वरी | | २ | भगमालिनी | | ३ | नित्यक्लिन्ना | | ४ | भेरुण्डा | | ५ | वह्निवासिनी | | ६ | महावज्रेश्वरी | | ७ | शिवदूती | | ८ | त्वरिता | | ९ | कुलसुंदरी | | १० | नित्या (नित्यांबा) | | ११ | नीलपताका | | १२ | विजया | | १३ | सर्वमंगला | | १४ | ज्वालामालिनी | | १५ | चित्रा (चिद्रूपा) | ### मुख्य विशेषताएँ * **आध्यात्मिक महत्व:** साधक इन देवियों की उपासना के माध्यम से आत्मिक उन्नति और विशिष्ट सिद्धियाँ प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। ऐसा माना जाता है कि ये देवियाँ न केवल सांसारिक इच्छाओं को पूर्ण करती हैं, बल्कि मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त करती हैं। * **कालचक्र से संबंध:** एक मान्यता के अनुसार, मनुष्य दिन भर में जो २१,६०० श्वास लेता है, उसका संबंध भी इन्हीं १५ नित्या देवियों के चक्र से जुड़ा होता है। * **उपासना:** प्रत्येक नित्या देवी का अपना विशिष्ट मंत्र, यंत्र और ध्यान श्लोक होता है। इनकी पूजा का विधान 'तंत्रराज तंत्र' और 'नित्यषोडशिकार्णव' जैसे ग्रंथों में विस्तार से वर्णित है।

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