
SHREE SHARMA
395 days ago
लेख: ईश-दण्ड विधान की अटलता और न्याय की दिव्य पुकार "क्रुद्ध होकर फैसले निर्मम सुनाये जायेंगे, छुपके जो दुष्कर्म कर आये दिखाये जायेंगे। भूलने देगा नहीं हां ईश दण्ड विधान को, वो अदालत में घसीटे और बुलाये जायेंगे।" ये पंक्तियाँ केवल कोई काव्यात्मक चेतावनी नहीं हैं, अपितु ईश्वरीय न्याय के उस अपरिहार्य सत्य की घोषणा हैं जिसे मानव चाहे जितना भी नकार दे, वह अपने पापों के फल से बच नहीं सकता। सनातन धर्म में ईश्वर केवल दयालु और करुणामय नहीं, वह 'धर्मसंस्थापक' भी हैं—जो अधर्म के नाश के लिए समयानुसार न्यायिक कठोरता धारण करते हैं। ईश्वर का दण्ड विधान कोई क्षणिक क्रोध से उत्पन्न नहीं होता, यह उस विराट ब्रह्म-न्याय का अभिन्न अंग है जो समस्त सृष्टि के संतुलन को सुनिश्चित करता है। यदि कोई व्यक्ति अपने दुष्कर्मों को समाज की आँखों से छिपा भी ले, तो भी वह ब्रह्म की दृष्टि से नहीं छिप सकता। 'सर्वज्ञः साक्षी च वायुरिव गमनं', अर्थात् ईश्वर प्रत्येक जीव की गति और प्रवृत्ति का साक्षी है। जब पाप का घड़ा भर जाता है, तब ईश्वरीय अदालत में आत्मा खींच लाई जाती है—न किसी नोटिस की आवश्यकता होती है, न किसी वकील की। वहाँ केवल सत्य बोला जाता है और कर्मों का लेखा-जोखा स्वयं आत्मा के अंतर में उभरता है। जिन्होंने छिपकर छल, हिंसा, अन्याय, और अधर्म के बीज बोए, वे सोचते हैं कि समय सबकुछ ढँक देगा। परन्तु समय ही वह गवाह बनता है जो ईश्वर के न्याय की प्रक्रिया को प्रारंभ करता है। न्याय में देर हो सकती है, लेकिन चूक नहीं—यह सिद्धांत ईश्वर के न्याय विधान की आधारशिला है। इसीलिए वे "निर्मम" दिखते हैं, क्योंकि उनका उद्देश्य केवल दया नहीं, धर्म की रक्षा है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान कहते हैं — "सदैव कर्तव्यमेव कर्म, यः कर्मफलसंन्यासी स नित्यसंन्यासी च योगी च", अर्थात् कर्म से कोई नहीं बच सकता, और फल उसी के अनुसार निश्चित है। कोई भी व्यक्ति चाहे राजमहलों में छिपा हो या अज्ञात अंधकार में, ईश-दृष्टि से कुछ भी ओझल नहीं। इसलिए, पंक्तियों की चेतावनी केवल डराने के लिए नहीं है, यह आह्वान है—धर्म की ओर लौटने का, जीवन को सत्य, करुणा और न्याय के मार्ग पर चलाने का। क्योंकि एक दिन वह काल आयेगा जब "वो अदालत में घसीटे और बुलाये जायेंगे", और तब उनके पास न कोई बहाना होगा, न अवसर। ईश्वर का न्याय मौन है, लेकिन अटल है। और उसका न्यायालय अनंतकाल तक खुला रहता है। जो आज निर्दोषों की चीखों पर हँसते हैं, कल उनके रुदन पर भी कोई दया नहीं करेगा।

Comments (2)

Rama Devi Sahu
Aug 1, 2025
Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna 🙏 Subha Dopahar Jii 🙏 Karunanidan Bhagwan ki Aasirbad se Aap ka Sab kuch Subh hi Subh Ho 🙏🌹🌹

Girish Kumar
Jul 31, 2025
Jai Shri Krishna 🙏
