
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
166 days ago
7.4.2026 प्रायः ऐसा देखा जाता है, कि *"जब किसी व्यक्ति पर कोई मुसीबत आ पड़ती है, वह चारों ओर से निराश हो जाता है, उसे कोई सही मार्ग दिखाई नहीं देता," तब वह घबराकर ईश्वर से प्रार्थना करता है, कि "हे ईश्वर! इस आपत्ति से अब आप ही मुझे निकालिए."* *"ऐसी आपत्ति की स्थिति में तो ईश्वर से प्रार्थना करनी ही चाहिए। परन्तु सामान्य परिस्थितियों में भी ईश्वर से प्रार्थना प्रतिदिन अवश्य करनी चाहिए।" "क्योंकि यदि एक दिन प्रार्थना करने से आपको लाभ हो सकता है, तो क्या प्रतिदिन करने से लाभ नहीं होगा? बिल्कुल होगा। तो फिर प्रतिदिन प्रार्थना क्यों न की जाए? अधिक से अधिक लाभ क्यों न लिया जाए?"* अतः बुद्धिमत्ता इसी बात में है, कि नियमित रूप से प्रतिदिन ईश्वर से प्रार्थना करें। *"जो भी आप कार्य सिद्ध करना चाहते हैं, उसकी पूर्ति के लिए पहले पूर्ण पुरुषार्थ करें, फिर प्रार्थना भी करें। तो निश्चित रूप से आपको सफलता मिलेगी।"* *"प्रतिदिन प्रार्थना करने से ईश्वर आपकी बुद्धि को बहुत उत्तम बना देगा। ईश्वर के द्वारा बनाई गई उस उत्तम बुद्धि से आप बहुत सावधानी से अपना जीवन जीयेंगे, और आपातकाल से भी सदा बचते रहेंगे।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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