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卐~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~卐 🌞दिनांक - 26 मार्च 2026 ⛅दिन- गुरुवार ⛅विक्रम संवत् - 2083 ⛅अयन - उत्तरायण ⛅ऋतु - वसंत ⛅मास - चैत्र ⛅पक्ष - शुक्ल ⛅तिथि - अष्टमी सुबह 11:48 तक तत्पश्चात् नवमी ⛅नक्षत्र - आर्द्रा शाम 04:19 तक तत्पश्चात् पुनर्वसु ⛅योग - शोभन मध्यरात्रि 12:32 तक तत्पश्चात् अतिगण्ड ⛅राहुकाल - दोपहर 02:05 से दोपहर 03:36 तक (उज्जैन मानक समयानुसार) ⛅सूर्योदय - 06:25 ⛅सूर्यास्त - 06:40 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार) ⛅दिशा शूल - दक्षिण दिशा में ⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:51 से प्रातः 05:38 तक (उज्जैन मानक समयानुसार) ⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:08 से दोपहर 12:57 तक (उज्जैन मानक समयानुसार) ⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:09 से मध्यरात्रि 12:56 तक (उज्जैन मानक समयानुसार) 🌥️व्रत पर्व विवरण - दुर्गाष्टमी, श्रीराम नवमी (स्मार्त), महातारा जयंती, सर्वार्थसिद्धि योग (शाम 04:19 से प्रातः 06:24 मार्च 27 तक) 🌥️विशेष - अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है व नवमी को लौकी खाना गौमांस के समान त्याज्य है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34) 🔹प्रातः भ्रमण की महत्ता 🔹 🔸 प्रातः एवं सायं भ्रमण उत्तम स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभप्रद है । पशुओं का राजा सिंह सुबह 3.30 से 5 बजे के दौरान अपने बच्चों के साथ उठकर गुफा से बाहर निकल के साफ हवा में भ्रमण कर आसपास की किसी ऊँची टेकरी पर सूर्य की ओर मुँह करके बैठ जाता है । सूर्य का दर्शन कर शक्तिशाली कोमल किरणों को अपने शरीर में लेने के पश्चात ही गुफा में वापस आता है । यह उसके बलशाली होने का एक राज है । 🔸भ्रमण पूज्य बापूजी की दिनचर्या का एक अभिन्न अंग है । उत्तम स्वास्थ्य की इस कुंजी के द्वारा आप मानो चरैवेति चरैवेति । आगे बढ़ो, आगे बढ़ो । यह वैदिक संदेश ही जनसाधारण तक पहुँचाना चाहते हैं । पूज्य श्री कहते हैं- "प्रातः ब्राह्ममुहूर्त में वातावरण में निसर्ग की शुद्ध एवं शक्तियुक्त ओजोन वायु का बाहुल्य होता है, जो स्वास्थ्य के लिए हितकारी है । प्रातःकाल की वायु को, सेवन करत सुजान। तातें मुख छवि बढ़त है, बुद्धि होत बलवान।। 🔹रोग प्रतिकारक शक्तिवर्धक अनुभूत प्रयोग🔹 🔸गाय के दूध की जितनी मात्रा हो उससे आधी मात्रा में पानी मिलाकर उसमे सोने की वस्तु (शुद्ध सोने का साफ़ सुथरा गहना चलेगा) डालकर धीमी आंच पर पानी जल जाने तक उबालें । देशी नस्ल की गाय के दूध में प्राकृतिक रूप से स्वर्णक्षार पाए जाते हैं । स्वर्ण के साथ दूध उबालने से स्वर्ण में स्थित स्वर्णक्षार भी दूध में मिल जाते हैं । यह स्वर्णसिद्ध गौदुग्ध रोगप्रतिकारक शक्ति को बढ़ाता है । इसका सेवन कर वृद्ध लोग भी तंदुरुस्त रह सकते हैं l सोना न हो तो चांदी का भी उपयोग किया जा सकता है । ▬▬๑⁂❋⁂๑▬▬        🚩जय श्री राम🚩        🚩धर्मो रक्षति रक्षितः        🇮🇳हिन्दू राष्ट्र भारत

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