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पितृपक्ष (श्राद्ध पक्ष) के दौरान निम्नलिखित चीजों और सब्जियों के सेवन की मनाही * **दालें व अनाज:** * **राजमा** नहीं बनना चाहिए। * **मसूर** की दाल नहीं बननी चाहिए। * **अरहर** की दाल नहीं बननी चाहिए। * **सब्जियाँ:** * **गाजर** नहीं खानी चाहिए। * **कुम्हड़ा / गोल लौकी** नहीं बननी चाहिए। * **बैंगन** का सेवन नहीं करना चाहिए। * **शलजम** नहीं खाना चाहिए। * **मसाले व अन्य सामग्रियां:** * **हींग** का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। * **प्याज** नहीं खाना चाहिए। * **लहसुन** का उपयोग नहीं करना चाहिए। * **काला नमक** नहीं लेना चाहिए। * **काला जीरा** का उपयोग नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार, पितृपक्ष (श्राद्ध) के दौरान पूर्णतः सात्विक, शुद्ध और सुपाच्य भोजन ग्रहण करने का विधान है: * **सब्जियां:** * **तोरी (तोरई), गिल्की और परवल** को पितृपक्ष में अत्यंत उत्तम माना जाता है। * **कच्चा केला, लौकी (लंबी वाली) और भिंडी** जैसी सात्विक सब्जियां खाई जा सकती हैं। * **जिमीकंद (सूरन)** और **अरबी** का उपयोग भी पारंपरिक रूप से किया जाता है। * **अनाज और दालें:** * **मूंग की दाल:** पितृपक्ष में केवल मूंग की दाल (धुली या छिलके वाली) को सबसे पवित्र और श्रेष्ठ माना गया है। * **गेहूं, जौ और चावल:** पितरों के तर्पण और भोजन के लिए जौ और चावल विशेष रूप से प्रमुख होते हैं। * **मसाले और तेल:** * साधारण नमक के स्थान पर **सेंधा नमक** का प्रयोग शुभ माना जाता है। * **सफेद जीरा, काली मिर्च, अदरक और हरी मिर्च** का संतुलित प्रयोग कर सकते हैं। * भोजन पकाने के लिए **शुद्ध देशी घी** या **तिल के तेल** का प्रयोग सबसे उत्तम माना जाता है। * **दूध और मिष्ठान:** * **गाय का दूध, दही और घी** ही उपयोग में लाया जाना चाहिए। * चावल और गाय के दूध से बनी **खीर** पितरों को अत्यंत प्रिय मानी जाती है। भोजन पूरी तरह से बिना लहसुन, प्याज, हींग या तामसिक मसालों के और शुद्ध मन से तैयार किया जाना चाहिए।

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