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*कामाख्या शक्तिपीठ - भारत का सबसे रहस्यमयी मंदिर, जहाँ 'स्त्रीत्व' और 'सृष्टि' का जश्न मनाया जाता है!* ​स्थान: नीलांचल पर्वत, गुवाहाटी (असम) गिरा हुआ अंग: योनि ​ओडिशा से अब हमारी आध्यात्मिक यात्रा पहुँचती है पूर्वोत्तर भारत के असम राज्य में। गुवाहाटी के नीलांचल पर्वत पर स्थित कामाख्या शक्तिपीठ को सभी 51 शक्तिपीठों में सबसे शक्तिशाली और सबसे रहस्यमयी माना जाता है। ​यह कोई साधारण मंदिर नहीं है, बल्कि तंत्र साधना और सृजन का एक बड़ा केंद्र है। ​इस महातीर्थ से जुड़े 3 अद्भुत और प्रामाणिक तथ्य: ​बिना मूर्ति का गर्भगृह: इस मंदिर के मुख्य गर्भगृह में माता की कोई गढ़ी हुई मूर्ति नहीं है। इसके बजाय, गुफा के अंदर एक प्राकृतिक चट्टान है जो 'योनि' के आकार की है। इस चट्टान के बीच से हमेशा एक प्राकृतिक झरने का पवित्र जल बहता रहता है। भक्त इसी जल को स्पर्श करके माता का आशीर्वाद लेते हैं। ​अम्बुबाची मेला और लाल रंग का रहस्य: हर साल जून के महीने में यहाँ 'अम्बुबाची मेला' लगता है। मान्यता है कि इन तीन दिनों में माता रजस्वला होती हैं। इस दौरान मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। (ऐसा माना जाता है कि पास बहने वाली ब्रह्मपुत्र नदी का पानी लाल हो जाता है।) तीन दिन बाद जब कपाट खुलते हैं, तो भक्तों को प्रसाद के रूप में लाल रंग का गीला कपड़ा दिया जाता है। ​दस महाविद्याओं का घर: कामाख्या केवल एक मंदिर नहीं है, बल्कि पूरा नीलाचल पर्वत एक 'महा-परिसर' है। मुख्य मंदिर के चारों ओर 'दस महाविद्याओं' (काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला) के अलग-अलग मंदिर स्थापित हैं। तंत्र-साधना के लिए इससे बड़ी जगह पूरी दुनिया में कोई और नहीं है। ​धार्मिक महत्व: कामाख्या शक्तिपीठ असल में उस 'मातृत्व शक्ति' का सम्मान है, जिससे यह पूरी दुनिया पैदा हुई है। हमारे समाज में जहाँ 'मासिक धर्म' को लेकर आज भी कई जगह झिझक है, वहीं सनातन धर्म का यह मंदिर सदियों से चीख-चीख कर कह रहा है कि जिस प्रक्रिया से जीवन का जन्म होता है, वह अशुद्ध नहीं, बल्कि सबसे पवित्र है। यह स्त्री की रचनात्मक ऊर्जा का साक्षात नमन है। ​ क्या आप नीलांचल पर्वत की उस रहस्यमयी और शक्तिशाली ऊर्जा को महसूस करने के लिए कभी कामाख्या गए हैं? 🙏🌺 जय मातादी जी 🙏💫

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