
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
148 days ago
गेंडा (Rhino) गर्मियों के दौरान अपना ज्यादातर समय पानी या कीचड़ (mud) में इसलिए बिताते हैं क्योंकि उनके शरीर की बनावट और जैविक ज़रूरतें कुछ खास होती हैं: * पसीने की ग्रंथियों की कमी: गेंडे के शरीर में इंसानों की तरह पसीने की ग्रंथियां (sweat glands) बहुत कम होती हैं। इस वजह से वे पसीने के जरिए अपने शरीर का तापमान कम नहीं कर पाते। पानी या कीचड़ में बैठने से उनके शरीर को बाहर से ठंडक मिलती है। * त्वचा की सुरक्षा: भले ही गेंडे की खाल बहुत मोटी दिखती हो, लेकिन वह काफी संवेदनशील होती है। धूप में ज्यादा देर रहने से उन्हें 'सनबर्न' हो सकता है। कीचड़ की एक परत उनकी त्वचा पर एक "नेचुरल सनस्क्रीन" की तरह काम करती है, जो उन्हें सूरज की अल्ट्रावॉयलेट किरणों से बचाती है। * कीड़ों से बचाव: पानी और कीचड़ की परत उन्हें मक्खियों, जूं और अन्य परजीवियों (parasites) के काटने से भी बचाती है, जो उनकी खाल के बीच के हिस्सों में पनप सकते हैं। * ऊर्जा का संरक्षण: भारी शरीर होने के कारण, गर्मी में चलने-फिरने से उनके शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है। पानी में रहने से उन्हें ऊर्जा बचाने और खुद को शांत रखने में मदद मिलती है। यही कारण है कि एक गेंडा दिन के सबसे गर्म घंटों में घंटों तक पानी या दलदल में लेटा हुआ पाया जाता है।
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