
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
191 days ago
जय श्री राम! अयोध्या धाम के राजा, प्रभु श्री रामलला सरकार की प्रातः कालीन श्रृंगार आरती का दृश्य अत्यंत दिव्य और भावविभोर करने वाला होता है। अयोध्या में प्रभु के जागने से लेकर उनके पूर्ण श्रृंगार तक की यह प्रक्रिया किसी उत्सव से कम नहीं है। यहाँ उस अलौकिक आरती का संक्षिप्त विवरण है: 🌞 प्रातः कालीन आरती का दिव्य क्रम * मंगला आरती: सबसे पहले प्रभु को जगाने के लिए मंगला आरती की जाती है। इस समय मंदिर का वातावरण शंखध्वनि और वैदिक मंत्रों से गूंज उठता है। * अभिषेक और श्रृंगार: प्रभु का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक किया जाता है। इसके बाद उन्हें रेशमी वस्त्र (पीताम्बर) और स्वर्ण आभूषणों से सजाया जाता है। * पुष्प वर्षा: ताजे सुगंधित गुलाब, गेंदा और कमल के फूलों से प्रभु का श्रृंगार किया जाता है, जिससे पूरा गर्भगृह महक उठता है। * श्रृंगार आरती: जब प्रभु अपने पूर्ण वैभव में दर्शन देते हैं, तब श्रृंगार आरती की जाती है। भक्त इस मनमोहक छवि को देखकर निहाल हो जाते हैं। 🌸 आरती का भाव > "भए प्रगट कृपाला, दीनदयाला, कौसल्या हितकारी।" > प्रभु के मुखमंडल पर वो मंद मुस्कान और उनकी विशाल आँखें भक्तों के सारे कष्ट हर लेती हैं। अयोध्या की पावन माटी में इस समय जो ऊर्जा होती है, वह शब्दों से परे है। 🚩 प्रमुख समय (अनुमानित) | आरती का नाम | समय | |---|---| | मंगला आरती | प्रातः 4:30 बजे | | श्रृंगार आरती | प्रातः 6:30 बजे | | भोग आरती | दोपहर 12:00 बजे | सियावर रामचंद्र की जय! पवनसुत हनुमान की जय!
Comments (1)

Rama Devi Sahu
Feb 20, 2026
बिनु सतसंग न हरिकथा, तेहि बिनु मोह न भाग। मोह गएँ बिनु रामपद, होइ न दृढ़ अनुराग॥ सत्संग के बिना भगवान की लीला-कथाएँ सुनने को नहीं मिलती, भगवान की रहस्यमयी कथाओं के सुने बिना मोह नहीं भागता और मोह का नाश हुए बिना भगवान् श्री राम के चरणों मे अचल प्रेम नहीं होता। जय सियाराम 🙏
