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20.1.2026 कुछ लोग कहते हैं, कि *"स्वर्ग और नरक कहीं आसमान में हैं, इस धरती पर नहीं हैं।"* वे लोग भ्रांति में हैं। *"वेदों के अनुसार वास्तव में स्वर्ग और नरक दोनों यहीं इसी धरती पर हैं।"* इनकी पहचान क्या है? *"सुख विशेष का नाम स्वर्ग है। और दुख विशेष का नाम नरक है।" "जो व्यक्ति सेवा परोपकार दान दया ईश्वर भक्ति सच्चाई और ईमानदारी से जीवन जीना स्वयं प्रसन्न रहना और दूसरों को सुख देना इत्यादि कार्य करता है, वह सारा दिन प्रसन्न रहता है। बस इसी का नाम स्वर्ग है। यह यहीं इसी धरती पर है।"* *"इसी प्रकार से यदि कोई व्यक्ति झूठ छल कपट चोरी बेईमानी रिश्वतखोरी हेरा फेरी दूसरों को दुख देना अन्याय करना पक्षपात करना आदि कार्यों में दिनभर लगा रहता है, तो इसका अर्थ है, कि वह सारा दिन दुखी रहने के कारण नरक में है।"* तो ये दोनों यहीं इसी धरती पर हैं। *"आप अपना निरीक्षण परीक्षण करें, कि आप स्वर्ग में जी रहे हैं या नरक में?"* *"यदि आप स्वर्ग में जी रहे हैं, तो बहुत उत्तम है। और यदि नरक में जी रहे हैं, तो उससे बाहर निकल कर स्वर्ग में जीने का प्रयत्न करें।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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