
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
208 days ago
🛕꧁ जय द्वारकाधीश꧂🛕 सोमनाथ पांचाल शिवजी ने क्यों लिया हनुमान अवतार.? 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 सर्वविदित है, वास्तव में शिवजी ही हनुमानजी थे और यह भी सत्य है कि भगवान राम ही शिव के हनुमान अवतार का कारण बने थे। रामायण में बताया गया है कि एक बार भगवान शिव की भी इच्छा हुई कि पृथ्वीलोक चलकर भगवान राम के दर्शन किये जायें। उस समय भगवान राम जी की आयु लगभग 5 वर्ष के आसपास रही होगी। भगवान शिव के सामने समस्या यह थी कि वह अपने असली रूप में जा नहीं सकते थे। ऐसे में एक दिन शिव ने माता पार्वती से कहा- "जानती हो पार्वती मेरे राम ने पृथ्वी पर जन्म लिया है! और उनके दर्शन की सेवा का मन हुआ है। मैरी इच्छा है कि अब मै यहां से चला जाऊं और जिस लोक में राम हैं वहीं मै भी रहूं" यह सुनकर पार्वती विचलित हो गईं और दु:खी होकर बोलीं कि हे स्वामी - "मुझसे ऐसी कौन-सी गलती हो गईं है कि आप मुझे यहां छोड़कर पृथ्वी लोक पर रहने जा रहे हैं।" उन्होंने कहा "स्वामी आप यदि जाते हैं तो जाइएं लेकिन एक बात सुन लीजिये कि आपके बिना मैं यहां जीवित नहीं रहूंगी।" पार्वती मां की बात सुनकर शिव को अहसास हुआ कि पार्वती भी मैरे बिना नहीं रह सकती है और अगर मैं यहां से गया तो निश्चित ही रूप से पार्वती अपने प्राणों की बलि दे देगी। ऐंसे में शिव भगवान मोह के एक चक्रव्यूह में फंस गएं। क्योंकि एक तरफ माता पार्वती जी के पास भी रहना था और दूसरी तरफ भगवान राम के लोक में भी जाना था। ऐसे में भगवान शिव ने अपने ग्यारह रुद्रों का पूरा राज माता पार्वती को बताया और बोले- देखो पार्वती इन ग्यारह रुद्रों में से एक रूप वानर का अवतार आज मै लेने वाला हूं। एक रुद्राक्ष में से आज एक रूप वानर होगा जो बाद में हनुमान के रूप में जाना जाएंगा। शास्त्र बताते हैं कि भगवान शिव सब जानते थे। शिव जी राम जी के पूरे जीवनकाल को देख पा रहे थे, वह जानते थे कि एक बार राम जी को पृथ्वी का कल्याण करने के लिए मेरी आवश्यकता होगी! शिवजी को यह भी पता था कि कलयुग में ना मैं नजर आऊंगा और ना ही राम, तब कोई अवतार भी धरती पर नहीं होगा। इसलिए शिव ने अपने एक शक्तिशाली रूप को जन्म दिया जो कलयुग में भी अजर-अमर रहेगा, और पृथ्वी लोक के लोगों के दुःख-दर्द को दूर किया करेगा। इसलिए आज भी भक्त लोग हनुमान जी के दर्शन साक्षात् कर लेते हैं। इस बात के कई सबूत मिल चुके हैं कि हनुमान जी आज भी धरती पर मौजूद हैं!! ॐ नमो भगवते रुद्रावताराय हनुमते नमः। . *🪷राम.राम.राम.राम.राम.li 🪷* *🪷राम.राम.राम.राम.li 🪷* *🪷राम.राम.राम.

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