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*हिन्दू एकता ✊🚩* *🌌 -- रात्री - चिंतन -- 🌌* =========================== *"कर्म को धर्म बनायें"* _______ *🌞मंदिर में पूजा अवश्य करें, लेकिन उसके साथ-साथ अपने प्रत्येक कर्म को भी पूजा बनाना अवश्य सीखिये। जीवन को इतनी निष्ठा, दिव्यता एवं उच्चता के साथ जिया जाना चाहिए कि हमारा प्रत्येक कर्म ही धर्म बन जाए। धर्म को कर्म से अलग करने जैसा भी नहीं है। धर्म को अलग से करने की अपेक्षा हमारा प्रत्येक कर्म ही धर्ममय बन जाए, इस बात के लिए सदैव प्रयासरत रहना चाहिए।* *🌞हमारा बोलना, सुनना, देखना और सोचना प्रत्येक आचरण इतना विवेकपूर्ण, ज्ञानमय एवं मर्यादित हो कि ये सब अनुष्ठान जैसे ही लगने लग जाएँ। धर्म के लिए अलग से कर्म करने की आवश्यकता नहीं है अपितु जो हो रहा है, उसी को ऐसे पवित्र भाव से करें कि वही धर्म बन जाए। हमारा प्रत्येक कर्म, हमारा व्यवहार एवं हमारा आचरण धर्ममय बन सके यही तो प्रभु आराधना का स्वरूप है। निष्ठापूर्वक पवित्र भावना से किया गया कर्म ही तो धर्म भी बन जाता है -..!!!* _____

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