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*भगवान शंकर ने मन लय होने के जो सवा लाख साधन बतलाए हैं उन सब में नाम सहित नादानुसन्धान ही परमोत्तम है. हे नादानुसन्धान ! तुम्हें नमस्कार है. तुम परम पद में स्थित कराते हो. तुम्हारे ही प्रसाद से मेरे प्राणवायु और मन विष्णुपद में लय हो जाएंगे. सिद्धासन से श्रेष्ठ कोई आसन नहीं है. कुम्भक के समान कोई बल नहीं है, खेचरी मुद्रा के तुल्य मुद्रा नहीं है. मन और प्राण को लय करने में नाद के तुल्य कोई सुगम साधन नहीं हैं. योग-साम्राज्य में स्थित होने की इच्छा हो तो सावधान होकर एकाग्र मन से नाद को सुनो.हे प्रभो ! मेरा चित्त आपके चेतन स्वरूप में लय हो जाय, यही वरदान चाहता हूं. शिवजीकृत ज्ञानसङ्कलिनी ग्रंथ में लिखा है*

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