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🌸 जहाँ प्रेम नाम नहीं पूछता, वहाँ भगवान प्रकट हो जाते हैं 🌸 🧘एक कस्बे में रसखान नाम का व्यक्ति रहता था। रोज़ की तरह वह एक छोटी-सी दुकान पर बैठा था। दीवार पर टँगी एक बालक की तस्वीर उसकी नज़र खींच लाई। घुँघराले बाल, हाथ में बंसी, चेहरे पर अद्भुत तेज। रसखान ने दुकानदार से पूछा,“ये बालक कौन है? इसे देखकर मन अपने आप ठहर जाता है।”🧘 🤹दुकानदार बोला, “इसे श्याम कहते हैं।” रसखान तस्वीर को निहारते हुए बोला, “बालक तो अत्यंत सुंदर है, पर ये नंगे पाँव क्यों है? ज़मीन तो कंटीली है… इसके चरणों में पीड़ा होती होगी।” दुकानदार मुस्कराया और बोला, “अगर दिल में दया जागी है, तो तुम ही चप्पल पहना देना।” यह वाक्य रसखान के हृदय में उतर गया। अगले ही दिन वह एक जोड़ी छोटी-सी चप्पल लेकर आया और बोला,“बताओ, श्याम कहाँ मिलेगा?”🤹 🧘दुकानदार ने कहा, “वो यहाँ नहीं रहता… वृंदावन में रहता है। वहाँ बांके बिहारी के नाम से जाना जाता है।” रसखान बिना देर किए वृंदावन चल पड़ा। मंदिर पहुँचा, लेकिन भीतर प्रवेश नहीं मिला। कोई विरोध नहीं, कोई शिकायत नहीं। वह मंदिर द्वार पर ही बैठ गया और मन ही मन बोला, “मेरा श्याम आएगा… मुझे यहीं मिलेगा।” दिन बीत गया। रात भी गुजर गई। भोर का उजाला फैलने लगा। तभी… घुँघरुओं की मधुर ध्वनि। रसखान चौंका, चारों ओर देखा। कुछ नहीं दिखा। फिर उसकी दृष्टि नीचे गई। एक नन्हा बालक उसके चरणों में बैठा था। वही श्याम। वही मुस्कान। लेकिन… उसके चरणों से रक्त बह रहा था। रसखान की आँखें भर आईं। उसने बालक को गोद में उठाया और व्याकुल होकर पूछा, “कन्हैया… तुम्हारे चरणों से खून क्यों बह रहा है?”🧘 🧍बालक ने कोमल स्वर में कहा, “मैं मंदिर से नहीं आया। मैं वहाँ से आया हूँ जहाँ तुमने मुझे अपने हृदय में बसाया है। जिस रूप को तुमने प्रेम से स्मरण किया, उसी रूप में मैं पैदल चला आया हूँ। रास्ते में काँटे लगे… पर तुम्हारे प्रेम ने मुझे थकने नहीं दिया।” उस क्षण रसखान समझ गया — भगवान मूर्ति में नहीं, भाव में प्रकट होते हैं। उसने श्याम को चप्पल पहनाई, सिर झुकाया और कहा, “हे श्याम, आज से मेरा जीवन, मेरी लेखनी, मेरे शब्द —सब तुम्हारे हैं।” कहते हैं, इसी दिन रसखान ने केवल भगवान को नहीं पाया, बल्कि स्वयं को भी पा लिया। 🙏💛

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