MyMandirInstall

“नर्मदा के कंकर-कंकर में शंकर” — यह केवल एक कहावत नहीं, बल्कि गहरी आस्था और परंपरा से जुड़ी एक सुंदर कथा है। कहा जाता है कि जब Shiva गहन तप में लीन थे, तब उनकी तपस्या से प्रकट हुई दिव्य ऊर्जा और पसीने की बूंदों से एक पवित्र धारा उत्पन्न हुई। वही धारा आगे चलकर पवित्र Narmada River के रूप में प्रवाहित हुई। इसी कारण नर्मदा को शिव की कृपा और शक्ति का स्वरूप माना जाता है। कथाओं में यह भी कहा जाता है कि भगवान शिव ने नर्मदा को आशीर्वाद दिया कि तुम्हारे तट पर मिलने वाला हर पत्थर मेरे शिवलिंग के समान पूजनीय होगा। समय के साथ नर्मदा के प्रवाह में पत्थर गोल और चिकने होकर स्वाभाविक रूप से शिवलिंग के आकार में बनने लगे। इन्हें नर्मदेश्वर शिवलिंग कहा जाता है। शास्त्रों में इन नर्मदेश्वर शिवलिंगों को स्वयंभू (प्राकृतिक) माना गया है। इसलिए इनमें पहले से ही दिव्य शक्ति का वास माना जाता है और इनकी पूजा या स्थापना के लिए अलग से प्राण-प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती। इन्हें घर या मंदिर में श्रद्धा से स्थापित कर सीधे पूजा की जा सकती है। इसी गहरी श्रद्धा के कारण संत-महात्मा कहते हैं “नर्मदा के कंकर-कंकर में शंकर, हर कण में महादेव का वास। जिसे नर्मदा के दर्शन मिल जाएँ, उसका जीवन हो जाए पावन और प्रकाश।” 🕉️🌿

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!