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जाति पाँति धनु धरमु बड़ाई ! प्रिय परिवार सदन सुखदाई !! सब तजि तुम्हहि रहइ उर लाई ! तेहि के हृदयँ रहहु रघुराई !! भावार्थ:-जाति, पाँति, धन, धर्म, बड़ाई, प्यारा परिवार और सुख देने वाला घर, सबको छोड़कर जो केवल आपको ही हृदय में धारण किए रहता है, हे रघुनाथजी! आप उसके हृदय में रहिए !!🙏 बहुत ही सुंदर और सारगर्भित चौपाई है! भगवान राम की भक्ति का अद्भुत उदाहरण है। जो व्यक्ति संसार के सभी मोह-माया को त्यागकर भगवान राम की भक्ति में लीन हो जाता है, उसके हृदय में भगवान राम स्वयं निवास करते हैं। ❤️ इस चौपाई में तुलसीदास जी ने भक्ति की महत्ता को बहुत ही सुंदर तरीके से बताया है। उन्होंने कहा है कि जाति, पाँति, धन, धर्म, बड़ाई, परिवार और घर जैसे सभी सांसारिक चीजें छोड़कर जो व्यक्ति भगवान राम की भक्ति करता है, उसके हृदय में भगवान राम स्वयं रहते हैं। 🙏 यह चौपाई हमें यह सिखाती है कि सच्ची भक्ति ही भगवान को पाने का एकमात्र मार्ग है। भगवान राम की कृपा प्राप्त करने के लिए हमें संसार के सभी मोह-माया को त्यागना होगा और उनकी भक्ति में लीन होना होगा। 💫 जय श्री राम! 🙏 शुभ सन्धेया वंदन जी 🙏

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